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आखिर क्यों अधिकारी सत्य स्वीकार करने में संकोच करते हैं.. मीडिया का काम है खबरों को दिखाना  पीएचई विभाग में पदस्थ बामनिया जी जल संकट की खबर लगते ही, बेवजह तिल मिलाने लगे.. साहब के अशुभ चिंतक बता रहे हैं रात को माल तेज हो गया था 

संवाददाता सुनील खोडे 

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जिले में यदि सबसे ज्यादा दुर्गति किसी विभाग की है तो वो है। पीएचई विभाग हाल ही में जिले में पीएचई विभाग के दफ्तर के सामने इतना बड़ा प्रदर्शन किया गया मटके फोड़े गए विभाग को हाय-हाय के नारे सुनने पड़े इतना बड़ा प्रदर्शन होने के बाद भी यदि जिम्मेदार अधिकारी अपने आप को पाक साफ समझने की गुस्ताखी करते हैं तो उनके लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य ओर क्या होगा । यदि जमीनी स्तर पर पीएचई विभाग के एसडीओ इंजीनियर और अन्य अधिकारी जिम्मेदारी के साथ काम करते तो निश्चित ही इतने बड़े आंदोलन का गुब्बारा जिले स्तर पर नहीं फुटता और ना ही विभाग की किरकिरी मिरमिरी होती है। हम बात करें पेटलावद मुख्यालय स्थित पीएचई विभाग की तो इस विभाग का भगवान ही मालिक है अधिकारी कार्यालय में बैठने नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जाते नहीं पेयजल की समस्या का समाधान करते नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट से कई गांव के ग्रामवासी जूझ रहे हैं ।

भारी मशक्कत के बीच ग्रामीणों को दूर दराज से पानी लाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। नल जल और जल जीवन मिशन में बनाई गई टंकियां सूखी पड़ी है नल की टोटियों में पानी नहीं है। जबकि विभाग की जिम्मेदारी है और इसका संचालन करवाने का कर्तव्य भी विभाग का ही है परंतु ठेकेदारों से साठ गांठ करके बनाई गई पेय जल टकिया महज़ सोपीस बनकर रह गई घटिया और गुणवत्ताहीन निर्माण विभाग के जिम्मेदारों की पोल खोलने के लिए काफी है। हेडपंप अपना अस्तित्व खो चुके हैं । परंतु विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कागजी आंकड़ों की बैसाखियों के सहारे आज भी दौड़ रहे हैं। परंतु जमीनी हकीकत और कागजी आंकड़ों में जमीन आसमान का अंतर आसानी से देखने को मिल जाएगा हम बात करें मुख्य बिंदु पर जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण शीर्षक खबर जैसे ही एक ग्रुप में शेयर हुई वैसे ही पीएचई विभाग में कोई बामनिया हैं। वो तिल मिला उठा खबर के बाद साहब को ऐसी खुजली चालू हुई कि ग्रुप में मेसेज तत्काल लिखकर शेयर कर दिया और खबर को झूठी बात रहा था योजनाओं को चालू बता रहे हैं।

साहब ऐसी सफाई देने लगे जैसे साहब दूध के धुले हो मेसेज लिखकर खुद ही ग्रुप से बाहर हो गए यदि साहब थोड़ी देर और ग्रुप में होते तो उन्हें जरूर खुजली का ट्यूब मिल जाता खेर जो भी हो पर साहब के करीबी एक अशुभ चिंतक ने बताया कि मामले को छोड़ो हो सकता है माल तेज हो गया था और आपकी खबर को देख तिल मिलाहट चालू हो गई थी। जब इस संबंध में महवडीपाड़ा के ग्रामीणों को बताया कि एक साहब खबर को झूठी बता रहे हैं तो क्या करना चाहिए वहां के सैकड़ों लोगों ने कहा साहब को यहां भेज दो हकीकत से साहब को रूबरू करवा देते हैं।

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