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अप्रैल-2024 तक जिला स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (डिया) की अनुमति ही रहेगी प्रभावी जिम्मेदार अधिकारियों को आदेश की पूरी जानकारी नहीं होने से आ रही दिक्कत, अब तक जिले में रॉयल्टी ही प्रारंभ नहीं की गई, शासन को हो रहा लाखों का नुकसान

झाबुआ। जिले के खनि पट्टेधारकों के लिए यह अच्छी खबर है कि 28 अप्रैल 2024 तक जिला स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (डिया) की अनुमति ही प्रभावी रहेगी। जिससे उन्हें स्टेट एनवायर मेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) की अनुमति लेने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। इसके लिए राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (पर्यावरण, वन एवम् जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार) के सदस्य सचिव मुजीबुर्रहमान ने बकायदा संचालक, भौमिकी एवम् खनिकर्म, भोपाल को पत्र भी जारी कर दिया है। इसके बावजूद स्थानीय अधिकारियों को पूरी जानकारी नहीं होने से झाबुआ जिले में अब तक रॉयल्टी ही जारी नहीं की गई है। जिसके चलते शासन को लाखों रुपए के राजस्व का घाटा हो रहा है। दरअसल कुछ माह पूर्व शासन ने एक आदेश जारी कर सिया यानि स्टेट एनवायर मेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी से अनुमति अनिवार्य कर दी थी। इसके चलते प्रशासन ने भी ऐसी सभी खनि पट्टेधारकों का काम रुकवा दिया था। इस बीच गत 21 दिसंबर को भारत सरकार के राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण की ओर से एक आदेश जारी हुआ। इसमें 28 अप्रैल 2024 तक जिला स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (डिया) द्वारा जारी पर्यावरण स्वीकृति को ही वैध बताते हुए प्रक्रिया का पालन करने की बात कही गई। ताकि खनिज की पर्याप्त उपलब्धता रहे और विकास कार्यों पर असर न पड़े। इसके बाद पूरे प्रदेश में रॉयल्टी जारी कर दी गई, लेकिन झाबुआ में अब तक आदेश का पालन नहीं हुआ है। दूसरी तरफ खनि पट्टेधारक सिया की अनुमति के लिए सारी कागजी कार्यवाई पूरी कर चुके हैं। विडंबना ये हैं कि प्रभारी अधिकारी को नियमों की पूरी जानकारी नहीं है। जिसके चलते कार्य समयावधि में नहीं हो पा रहे हैं। अब तक रॉयल्टी ही जारी नहीं की जा सकी है। विभागीय कर्मचारियों में भी आपसी तालमेल नजर नहीं आ रहा है। आम लोगों पर असर- रॉयल्टी जारी नहीं होने से जिले में संचालित गिट्टी क्रेशर का कामकाज ठप हो गया। इसका सीधा असर अलग अलग निर्माण प्रोजेक्ट पर पड़ा है। जो लोग अपने मकान बनवा रहे हैं वे भी गिट्टी के लिए परेशान हो रहे हैं।

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