दिलीप सिंह भूरिया आलीराजपुर ब्यूरो चीफ
आलीराजपुर जिले के अधिकतर गांवों नगरों में फर्जी डॉक्टरों का आतंक है बरझर के अलावा चांदपुर में भी इन फर्जी डॉक्टरों के क्लीनिक और हॉस्पिटल धड्डले से चालू है लेकिन जिला प्रशासन की नींद ही नहीं खुलती साथ ही स्वास्थ्य विभाग तो गांधारी बना हुआ है जिले के नानपुर में इन्हीं फर्जी बंगाली डॉक्टरों के फर्जी इलाज के कारण दो लोगों की जान चली गई थी ।

लेकिन जांच में दूसरी वजह निकालकर उनकी मौत को भी हादसा जैसा दिखाकर उन फर्जी डॉक्टरों को सिर्फ मामूली धाराओं में प्रकरण बनाकर उनको कानूनी राहत कोर्ट से मिल गई और वही फर्जी बंगाली डॉक्टर बिना अनुमति फिर से गांव बदलकर इलाज फिर से कर रहे है और प्रशासन मौन है ।।
जबकि जिले में कोई गरीब आदिवासी सड़क किनारे ताड़ी या शराब अवैध रूप से बेच रहा है तो प्रशासन उन पर बिना किसी आदेश निर्देश के गली गली गांव गांव घूम घूम कर उनपर प्रकरण दर्ज कर ताड़ी दारू जप्त करते नजर आते है और उनको साल भर तक के लिए जेल भी भेजवा दिया जाता है जब जिले में बिना अनुमति ताड़ी दारू बेचना कानूनी अपराध है तो बिना अनुमति बिना डिग्री इलाज करना भी तो एक अपराध है इनके ऊपर फिर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कार्यवाही क्यों नहीं करता क्या कोई बंगालियों की तरह से पुरूस्कार मिलता है या कुछ और यह तो बहुत गंभीर विषय है समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं खुलना और कुंभकर्णीय नींद में सोना पूरे जिले और आदिवासियों की मौत का कोई षड़यंत्र नहीं हो क्योंकि लगातार जिले भर में मौतें होती आई है पिछले 30 सालों में आलीराजपुर जिले में 10 पांच बंगाली फर्जी डॉक्टर होते थे जो आजकल उनकी संख्या 450 से भी ज्यादा हो गई है

क्या आलीराजपुर जिला इतना सेफ है कि यहां मेडिकल से दवाइयां भी बिना डिग्री के बंगाली डॉक्टरों को आसामी से मिल रही है और उनके क्लिनिकों और हॉस्पिटलों पर लाखों रुपए की दवाइयां और स्वास्थ्य विभाग में आने वाले उपकरण भी मिलते है वो भी लाखो के है ।आगे देखना है स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन कब कार्यवाही करते हैं बरझर और चांदपुर में धीरे धीरे फर्जी बंगालियों की संख्या लगातार बढ़ रही है ।