भानु भी इनके चक्कर में आकर मुग़ालते नी पाले की जीत रिया ये हारने वालों में से है जीताने वालों में से नी..!
भियाँ सभी को राम राम…!
लो भियाँ.. में फिर आ गिया कुछ कही अनकही के साथ..!
भियाँ आपने वो कहावत सुनी होगी.. आस्तीन में साँप पालना.. एसेईज भानु भी सफ़ेद पोश काले भाई साब को पाल रिया है.. जो एक बार फिर भानु कोईज डसेगा.. जैसे उपचुनाव में डसा था.. और भानु को हार का सामना करना पड़ा था.. पैसा भी खाया और बाद में दारू भी ये कह कर दिया दारू कमल गट्टों की पियो और बटन हाथ छाप का दबाओ.. अगर झूट है तो काले भाईसाब खा जाए सूखे अंगूर की क़सम..! अभी भी हाथ छाप वालों के साथ बैठ गिया है और कर लिया भानु का सौदा.. सौदा भी अच्छी रक़म में हुआ.. तभीईज तो भियाँ जाँ इसको काम सौंपा वाँ जा नी रिया.. ये जो भानु का विरोध हो रिया है वो कोई और नी काले भाई साब के इशारों पर हो रिया है.. ख़ैर पिछली बार भी भानु को सतर्क किया था इस बार भी कर रिये है.. लेकिन लग रिया है भानु अभी से इनके जाल में फसगिये.. येईज है जो रानापुर में भानु के भाइयों के बारे में तरह तरह की बात उड़वा रिये है..
भियाँ भानु हम तो चाहते है की तुम आगे बढ़ो.. इसलिए सतर्क कर रिये है.. लेकिन अभी ऐसा लग रिया है तुम भी इनके चक्कर में आ कर मुग़ालते पाल रिये हो.. चलो माना ये तुम्हारा पक्षधर है.. तो तुम्हारे जन्मदिन पर.. टिकट मिली तब इसके गुर्गे ओरतों के दलाल गणीया ने बधाई की पोस्ट क्यू नी डाली.. अब खा जाए ये सूखे अंगूर की क़सम.. भियाँ और भी बहुत कुछ है वो बाद में बिताऊँगा..!
अब जा रिया हूँ.. लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दूँ.. ये जो कार्यालय खोला है वो माताजी के नाम पर नयन सुख के लिए खोला है याँ बैठों और सामने ताड़ी पियों..? भियाँ आज थोड़ा व्यस्त ही इसलिए थोड़े में निपटा रिया हूँ जल्द ही बड़ा धमाका होगा.. अब जा रिया.. जय राम जी की..!