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भियां दल्ले पत्रकारों अधिकारी तो चले जायेगे तुमारा क्या होगा…? कईयं तुमारी दलाली के पन्ने न खुल जायें फिर कहां मुंह दिखाओंगे…!

भियां सभी को राम राम…!

लो भियां मैं फिर आ गिया… कुछ कही-अनकही के साथ…

भियां वो केते है नी पत्रकार समाज को सच का आयना दिखाता है… पर भियां हमारें यां तो झुठ का आयना दिखाया जाता है… हमारें यां के चंद दल्ले किस्म के ऐसे पत्रकार है जो सरकारी मुलाजिमों की ऐसी दलाली करते है कि अधिकारी पिछवाडा चाटने को केदे तो चाट लेंगे… और ये भी केंगें.. साब अच्छा लगा मजा आ गिया… चलों भियां करों दलाली… लेकिन दुसरें पत्रकारों की चुगली तो मत करों… मालुम है… तुम दल्ले हो…। जिले भर के पत्रकारों का ठेका मत लो… सब तुमारे जैसे नी है…!

अब भियां हमारें यां दल्ले किस्म के पत्रकारों को ट्रेंड बन गिया है अधिकारियों और नेताओं की चाटों… और दुसरें पत्रकारों को नीचें दिखाओं… अब भियां ये के दुं… अधिकारी और नेता तो आते जाते रेते है… तुमारा क्या होगा… तुम्हारे नीचे तो रेले ही रेले है… कौन कहां सेंध मार रिया है… किसके घर में किसका टाका किसके साथ है… ये सबकु पता है… कौन किस नेता और सेठ की चाट रिया है… सबको पता है… तुम चंद दल्ले जिले भर के ठेकेदार मत बनो… मै न तो काला हुं… और ना ही काले कारनामें करता हुं… लेकिन तुमारी बची कुची इज्जत… निलाम हो जायेगी… ये जो अधिकारियों और नेताओं को जो तुम चुगली कर नीचा दिखा रिये हो… इसके अखबार की ये खबर, इसका उससे झगडा…. अगर हम सब ने मिल कर पिटारा खोला तो भागते फिरोगे… अधिकारी तो चले जायेगे… इसलिए तुम दलाली कर रिये हो तो करो… हमकों कोई मतलब नी… और अधिकारी भी ध्यान दे… ये जो दलाली कर रिये है… ये जैसा हम लिख रिये है… ये दल्ले तुमको हाथ भी नही दे पायेगे… अगर पीछे पड गिये तो छोडेगे नी… अब देखो नी दो दिन पेले की बात है… मैने एक पत्रकार से बात की… थोडी देर में अधिकारी ने आदिवासी संगठन के पदाधिकारी से वोईज बात की गई… अब वो अधिकारी सभी को सफाई देता फिर रिया है… कि भियां ऐसा नी ऐसा है… और भियां पत्रकार तुम हथेली नी दे पाओगे… पत्रकार महोदय… जो जो उस अधिकारी के आस पास बैठ कर ज्ञान पेल रिये है… उन सब के पीछवाडे में तेल नी कुड दिया तो नाम बदल देना…!

अब भियां जा रिया… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं… मत करो… के रिया हुं… अब छोटी सी भी बात… या जालसाजी की… तो केना मत… नंगा हुं… और नंगे के नौ गृह बलवान होते है… मेरा तो कुछ नी होगा… तुमारी दलाली की पुरी किताब है… खोल दी… तो भागते फिरोगे… अधिकारी तो चला जायेगा… तुमारी इज्जत की मां….. द… . जायेगी…

बाकि अगले अंक में अब जा रिया… जय राम जी की…!

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