

*वॉइस ऑफ झाबुआ सुनील डामर *
पेटलावद। पूर्व ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. सुरेश कटारा सहित उनके ड्राइवर मुकेश और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ पेटलावद थाने में विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता अर्जुन पिता मडिराम गरवाल (27), निवासी ग्राम बोडायता, चौकी सारंगी ने पुलिस को दिए आवेदन में मारपीट, जबरन ले जाने, मोबाइल से वीडियो डिलीट करने, कोरे स्टाम्प पर हस्ताक्षर करवाने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार, 24 सितंबर को अर्जुन अपनी पत्नी की डिलीवरी के लिए सारंगी अस्पताल पहुंचा था। वहां से उसे पेटलावद अस्पताल रेफर किया गया, जहां शाम करीब 7 बजे उसकी पत्नी की डिलीवरी हुई। आरोप है कि उसी रात उसने सिस्टर को 300 रुपए दिए। अगले दिन छुट्टी के कागज लेने पहुंचने पर उससे कथित तौर पर 2 हजार रुपए मांगे गए। अर्जुन के अनुसार, उसने 500 रुपए देने की बात कही तो उसे बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद उसने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
वीडियो वायरल करने के बाद घर पहुंचने का आरोप
FIR में आरोप लगाया गया है कि इसी घटना के बाद उसी दिन शाम करीब 5 बजे डॉ. सुरेश कटारा का ड्राइवर मुकेश और टोपी पहने एक अन्य व्यक्ति अर्जुन के घर पहुंचे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों उसे जबरदस्ती मोटरसाइकिल पर बैठाकर सारंगी स्थित डॉ. कटारा के क्लिनिक/घर ले गए।
अर्जुन के मुताबिक वहां डॉ. कटारा, ड्राइवर मुकेश और एक अन्य व्यक्ति ने उससे सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर कार्रवाई नहीं करने का लिखित बयान देने तथा पैसे अपनी इच्छा से देने की बात लिखने के लिए कहा। शिकायतकर्ता के मना करने पर उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप है।
लोहे की रॉड से वार करने का आरोप
शिकायत के अनुसार, डॉ. सुरेश कटारा ने कथित तौर पर लोहे की रॉड से उसके हाथ और कंधे पर वार किया, जबकि ड्राइवर मुकेश और उसके साथी ने थप्पड़-मुक्कों से मारपीट की। अर्जुन ने आरोप लगाया कि उसका आधार कार्ड छीन लिया गया, कोरे स्टाम्प पर हस्ताक्षर करवाए गए और मोबाइल से वायरल वीडियो डिलीट कर दिया गया। इसके साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
घटना के बाद अर्जुन घर पहुंचा और अपने परिचितों को घटना की जानकारी देने के बाद थाने पहुंचा। थाने पर राष्ट्रीय आदिवासी क्रांति सेना और जयस के विभिन्न पदाधिकारियों भी पहुंचे व पुलिस ने शिकायत के आधार पर BNS 2023 की धारा 140(3), 308(1), 296(a), 115(2), 351(2) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है।