वाह साईको कलमकार…! अपनी खीज उतारने के लिए कलमकारों के कंधों का इस्तेमाल…!

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भियां सभी को राम… राम… लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ… भियां वो केते है ना… अधजल गगरी छलकत जाय… ऐसाईज कुछ साईको कलमकार अपने आधे ज्ञान के चलते कर रिया है… भियां दो भडकाउ खबरे… और कुछ संगठनों से जुड अपने आप को बडा ज्ञानी समझने लग गिया… जिसे वो ज्ञान समझ रिया है… उसे भियां दुसरों के खिलाफ खीज निकालना केते है… और अपनी खीज निकालने के लिए भियां इसने कलमकारों के कंधों पर बंदुक रखी… अब भियां आप सोच रिये होंगे साईको कैसे… तो भियां बिता दुं… कलमकार का काम है खबर लिखना… कलमकार ने शहद खराबी को उजागर किया… तो भियां इस साईको ने सोशल मीडिया पर एक अपशब्दों भरा लेख लिखा… स्वास्थ्य विभाग में एक कलमकार बाईट लेने आगे खडा हुआ और बाईट लेकर थैंक यु कह कर निकल गया तो भी इसको बुरा लगा और इसने उस पर भी अपनी खीज निकाली…. भियां अब कलमकारों ने अपना संगठन बनाया… और इसकु नी बुलाया तो इसने फिर खीज निकालने के लिए ताबडतोड अपना संगठन बनाया… अब साईको नी केंगे तो क्या केंगे…
भियां अब बात करें संगठन की… भियां जब इसको दुसरे कलमकारों ने नी बुलाया तो ताबडतोड इसने दुसरें कलमकारों के कंधे पर बंदुक रख उन्हे एक जाजम में बैठने और कलमकारों की उपेक्षा की बात कह कर… एक बैठक आयोजित की… भियां उस बैठक में मैं भी गिया… और देखा सिर्फ भाषण बाजी… और मंच से दुसरे संगठन की उपेक्षा और एक सम्मानीय कलमकार के खिलाफ भडकाउ भाषण इस साईको कलमकार द्वारा दिया गया… तब मेकु लगा… भियां हममें कितना भी मनमुटाव होता है… पर कभी मंच से हम किसी के खिलाफ नही बोलते… इतना तो सम्मान देते है क्योंकि वो वरिष्ठ है… पर भियां यां तो सारी हदे पार कर दी गई… और न सलाह ली और न ही मशवरा बस खुद ने बुलाकर खुद का नाम अध्यक्ष के लिए घोषित कर दिया और खुद ने माला बुलवा कर खुद को पहनवा ली और केक भी कटवा दिया… सब सोच में डुब गए आखिर सब को बुलाया क्यों? जब एक जाजम पर बैठने की बात थी तो अपने मुंह मियां मिटठु बन खुद की वाहवाही लुट ली… भियां असल बात तो यह थी कि इसे दुसरे संगठन को नीचा दिखाना था इसलिए कलमकारों की बैठक बुलवाई… और इसलिए भी क्योंकि दुसरे गुट का वो ही कलमकार अध्यक्ष बना जो अधिकारी को थेंक यू कह कर निकल गया था… वो सुर्खियों में आया तो इसे भी सुर्खियों में आना था और उसके खिलाफ अपनी खीज निकाली थी और दुसरा पदाधिकारी वो ही था जिसने शहद खराब होने की बात कही… तो बस क्या था कलमकारों के कंधे थे और अपनी खीज निकालनी थी… ऐसे लोगों को ही तो साईको कहते है… भियां साईको साहब… अच्छा मुकाम हासिल करने के लिए मेहनत और त्याग तपस्या भी करनी होती है… आधे ज्ञान से अपने आप को ज्ञानी मत समझो… ये तो भला हो इन्होने कुछ नी कहा और तुमारे हौसलें बुलंद हुए… अगर कोई कुछ करता तो सारी हेकडी निकल जाती… बडी बात तो यह है कि आज तक ऐसा संगठन नही देखा जो बिना सहमती के आयोजक खुद अपने को पदाधिकारी घोषित कर दे और खुद ही माला पहनवा ले… और रही बात सम्मान की तो उस बैठक में एक वरिष्ठ कलमकार भी आए थे… उन्हे ही आप भूल गए… जो ग्रुप बनाया उसमें भी कई सम्मानिय कलमकार थे… थोडा रूकते… पर नही प्लानिंग तो पहले से ही बन गई थी… तो क्या था… बस अपनी टांग उपर करनी थी… और कंधा कलमकारों का इस्तेमाल करना था। अभी तो भोत कुछ है बाकि बाद में बिताउंगा…!
अब जा रिया… जाते जाते एक बात और के दुं… ये बिता दुं… भियां साईको… ये जो बडा बनने की सोच छोड दो… मेहनत करों… अपने आप बडे हो जाओगे… अभी तक किसी ने कुछ नी कहा तो ये मत समझों ज्ञानी हो गिये… अभी ज्ञान अधुरा है… और ये सोशल मीडिया पर लेखों का खेल हमारे साथ किया… तो पुरी चड्डी उतर जायेगी… अब जा रिया जय राम जी की।

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