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आवास की किस्त के नाम पर 5 हजार रुपये लेने का आरोप, वीडियो सामने आने से मचा हड़कंप! बरवेट में प्रधानमंत्री आवास योजना की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पुराने मकान की जियोटैगिंग और किस्त जारी होने की प्रक्रिया संदेह के घेरे में एसडीएम से शिकायत, जनपद सीईओ ने निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा; सचिव ने कहा—शिकायतकर्ता से चर्चा के बाद दूंगा जवाब

आवास की किस्त के नाम पर 5 हजार रुपये लेने का आरोप, वीडियो सामने आने से मचा हड़कंप!

 

बरवेट में प्रधानमंत्री आवास योजना की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पुराने मकान की जियोटैगिंग और किस्त जारी होने की प्रक्रिया संदेह के घेरे में

 

एसडीएम से शिकायत, जनपद सीईओ ने निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा; सचिव ने कहा—शिकायतकर्ता से चर्चा के बाद दूंगा जवाब

पेटलावद/बरवेट। गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित वसूली का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। झाबुआ जिले के पेटलावद विकासखंड के ग्राम बरवेट में आवास योजना की किस्त दिलाने के नाम पर हितग्राही से 5 हजार रुपये लेने का आरोप लगा है। मामले में पंचायत सचिव हुरजी मैडा का कथित तौर पर पैसे लेते हुए वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में एसडीएम को शिकायत सौंपकर जांच की मांग की है। वहीं, जनपद पंचायत के सीईओ गौरव जैन ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

 

किस्त के नाम पर 5 हजार रुपये लेने का आरोप, बीमार परिवार की परेशानी भी आई सामने

 

शिकायतकर्ता जगदीश सिंगाड़ ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्त दिलाने के नाम पर उनसे 5 हजार रुपये लिए गए। शिकायत के अनुसार, परिवार का मुखिया गंभीर रूप से बीमार है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से कथित तौर पर राशि लिए जाने का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गरीब हितग्राहियों को सरकारी योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है। सवाल यह है कि क्या योजना की किस्त जारी करने के नाम पर हितग्राही से राशि मांगी गई? यदि ऐसा हुआ, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

 

4-5 साल पुराने मकान की जियोटैगिंग पर सवाल, चार-पांच दिन में निर्माण कैसे हुआ?

 

मामले में पासुलाल सिंगाड़ के मकान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, संबंधित मकान करीब चार से पांच साल पहले ही बन चुका था। इसके बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किस्त जारी होने की बात सामने आई है।

 

शिकायत में दावा किया गया है कि पंचायत सचिव ने 27 जुलाई 2026 को मकान का प्लिंथ लेवल जियोटैग किया था। इस दावे के बाद योजना के तहत निर्माण की प्रगति के सत्यापन और जियोटैगिंग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

यदि मकान पहले से निर्मित था, तो उसका प्लिंथ लेवल जियोटैग किस आधार पर किया गया? किस्त जारी करने से पहले निर्माण की स्थिति का सत्यापन किसने किया? क्या जियोटैगिंग निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुई थी? इन बिंदुओं की जांच जरूरी है। संबंधित अभिलेखों और जियोटैगिंग की तारीखों का सत्यापन होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

तीन किस्तों में मिलती है 1.20 लाख रुपये की सहायता

 

प्रधानमंत्री आवास योजना के ब्लॉक समन्वयक अंकित पांचाल के अनुसार, योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को कुल 1.20 लाख रुपये की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। ऐसे में पात्रता निर्धारण, निर्माण की प्रगति का सत्यापन और किस्त जारी करने की प्रक्रिया का नियमानुसार एवं पारदर्शी होना आवश्यक है।

 

सीईओ बोले—शिकायत मिली है, निष्पक्ष जांच कराएंगे

 

जनपद पंचायत सीईओ गौरव जैन ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए मामले में निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है। दूसरी ओर, पंचायत सचिव हुरजी मैडा ने आरोपों के संबंध में कहा कि शिकायतकर्ता से बातचीत करने के बाद ही वह अपना जवाब देंगे।

 

अब जांच पर टिकी निगाहें

 

बरवेट में सामने आए इस मामले में कथित लेन-देन के वीडियो की सत्यता, शिकायत में लगाए गए आरोपों, पुराने मकान की जियोटैगिंग तथा किस्त जारी करने की प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी। प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कहीं योजना के नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ और यदि अनियमितता सामने आती है, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।

 

अब बड़ा सवाल यह है कि गरीबों को पक्का मकान देने वाली योजना में यदि कथित वसूली हुई है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? फिलहाल ग्रामीणों और हितग्राहियों की निगाहें प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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