
झाबुआ, 26 अक्टूबर। पेटलावद स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में व्यवस्थाओं और पूर्व प्राचार्य को लेकर सामने आए विवाद के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। विद्यार्थियों की शिकायतों और स्टाफ के बीच विवाद को लेकर पहले भी जांच की जा चुकी है। अब हालिया घटनाक्रम में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। प्रशासन ने तीन व्यक्तियों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई किए जाने तथा पालक समिति संघ के अध्यक्ष को पद से हटाने की कार्रवाई की जानकारी दी है।
विद्यार्थियों के पैदल मार्च के बाद हरकत में आया प्रशासन
24 अक्टूबर को विद्यालय के छात्र-छात्राएं व्यवस्थाओं और पूर्व प्राचार्य के संबंध में शिकायत लेकर पैदल मार्च करते हुए झाबुआ के लिए रवाना हुए थे। सूचना मिलने पर जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और विद्यार्थियों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। समस्याओं के निराकरण का आश्वासन देने के बाद धरना समाप्त कराया गया तथा विद्यार्थियों को वाहनों से सुरक्षित छात्रावास पहुंचाया गया।
पूर्व में भी हुई थी जांच, कार्रवाई प्रक्रियाधीन
प्रशासन के अनुसार, पूर्व प्राचार्य के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों और स्टाफ के बीच विवाद के संबंध में एसडीएम पेटलावद एवं जिला स्तरीय जांच समिति ने जांच की थी। जांच प्रतिवेदन 8 अगस्त 2026 को आयुक्त, एमपी सरस, भोपाल को भेजा गया था। संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं और अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
प्रशासन ने यह भी बताया कि पूर्व में अनुशासनहीनता के मामले में पूर्व प्राचार्य सहित तीन स्टाफ सदस्यों की प्रोबेशन अवधि बढ़ाई गई थी। संबंधित चार व्यक्तियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS), नई दिल्ली को भी अवगत कराया गया था।
विद्यार्थियों को भ्रामक जानकारी देने की आशंका की जांच
जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच दल की प्रारंभिक जांच में सीसीए नियमों के उल्लंघन से संबंधित तथ्य प्रथम दृष्टया सामने आने की बात कही गई है। हालिया घटनाक्रम में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
विद्यार्थियों को कथित रूप से भ्रामक जानकारी देकर प्रभावित किए जाने की आशंका को लेकर उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत प्रतिवेदन NESTS, नई दिल्ली भेजा जाएगा। संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी पत्राचार किया जा रहा है।
अब विद्यार्थियों की समस्याओं पर रहेगी सीधी नजर
भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने और विद्यार्थियों से लगातार संवाद बनाए रखने के लिए जिले के विद्यालयों में ‘बालक मित्र अधिकारी’ नियुक्त किए गए हैं। ये अधिकारी विद्यार्थियों की समस्याएं सुनेंगे और उनके निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों से समन्वय करेंगे।
प्रशासन ने विद्यार्थियों से अपुष्ट अथवा भ्रामक जानकारी से प्रभावित नहीं होने तथा अपनी समस्याओं के समाधान के लिए विद्यालय प्रबंधन, बालक मित्र अधिकारियों और जिला प्रशासन से सीधे संवाद करने की अपील की है।
जिला प्रशासन के अनुसार, विद्यालय की व्यवस्थाओं और स्टाफ की कार्यप्रणाली पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। विद्यार्थियों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।