संवाददाता: सुनील खोडे, पेटलावद
पेटलावद। कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित जिला स्तरीय जांच दल ने बुधवार को एक बार फिर पेटलावद स्थित पाटीदार डायग्नोस्टिक पैथोलॉजी लैब पर दबिश देकर जांच की। इससे पहले भी शिकायतों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम लैब की जांच कर चुकी है। लगातार दूसरी बार हुई इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
DHO ने की दस्तावेज और मशीनों की जांच
जिला स्वास्थ्य अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लैब पहुंचकर वहां उपलब्ध दस्तावेजों, जांच संबंधी रिकॉर्ड तथा प्रयोग में लाई जा रही मशीनों का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान मशीनों के रखरखाव और तकनीकी मानकों की भी पड़ताल की गई। सूत्रों के अनुसार मशीनों का मेंटेनेंस करने वाली कंपनी को भी नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पहले भी हो चुकी है जांच
गौरतलब है कि इससे पूर्व तत्कालीन CMHO डॉ. एम.एल. चोपड़ा के निर्देश पर एक जांच दल गठित किया गया था। इस टीम का नेतृत्व झकनावदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. शोभित शुक्ला को सौंपा गया था। उस दौरान भी लैब की जांच की गई थी और शिकायतकर्ता के अनुसार टीम को कई त्रुटियां मिली थीं। हालांकि उस जांच की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

3 बार जनसुनवाई में शिकायत
ग्राम पंचायत अमरगढ़ के सरपंच पिंटू भूरिया का कहना है कि उन्होंने इस मामले में तीन बार जनसुनवाई के माध्यम से कलेक्टर को शिकायत प्रस्तुत कर कार्रवाई की मांग की है। उनके अनुसार पहली जांच के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई, जिसके बाद उन्होंने दोबारा शिकायत की। अब जिला स्तरीय टीम द्वारा पुनः जांच किए जाने पर उनके बयान भी दर्ज किए गए हैं।
‘लैब को सील किया जाए, नहीं तो अनशन’
सरपंच पिंटू भूरिया ने मांग की है कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो पाटीदार पैथोलॉजी लैब को तत्काल सील कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। उनका आरोप है कि गलत जांच रिपोर्टों के कारण गरीब मरीजों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरपंच ने चेतावनी दी कि यदि जांच को दबाने या कार्रवाई में अनावश्यक विलंब करने का प्रयास किया गया, तो वे पेटलावद स्वास्थ्य विभाग कार्यालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठेंगे। साथ ही मामले की शिकायत स्थानीय विधायक व केबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया, प्रभारी मंत्री कुँवर विजय शाह, स्वास्थ्य मंत्री, कमिश्नर और भोपाल आयुक्त तक करेंगे।
क्या होगा आगे?
अब लगातार दो बार हुई जांच और तीन शिकायतों के बाद यह मामला प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है। हालांकि कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद यह माना जा रहा है कि कार्रवाई होना तय है।