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रेंजर हटिला ओर डिप्टी तारसिंह भाभर के सरंक्षण में मनरेगा के तालाब निर्माण में जेसीबी का खेल! 24 लाख की लागत वाले कार्य में मशीनों से खुदाई के आरोप, ग्रामीणों ने किया विरोध मामला थांदला वन क्षेत्र का 

संवाददाता सुनील खोडे 

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पेटलावद । थांदला वन परिक्षेत्र अंतर्गत रूपगढ़ ग्राम पंचायत के ग्राम भेरूपाड़ा स्थित लिमड़ा वाली नाकी पर लगभग 24 लाख रुपये से अधिक की लागत से बनाए जा रहे तालाब निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मनरेगा के तहत स्वीकृत इस निर्माण कार्य में मजदूरों से काम कराने के बजाय नियमों को दरकिनार कर दिन-रात जेसीबी मशीनों से खुदाई करवाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य में वन विभाग के रेंजर तोलाराम हटीला एवं डिप्टी रेंजर तारसिंह भाभर के संरक्षण में मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। जबकि मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है। ऐसे में मशीनों के इस्तेमाल से मजदूरों का रोजगार प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीण बोले : मजदूरी नहीं मिल रही, पलायन को मजबूर हैं –

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध नहीं होने से उन्हें मजदूरी के लिए दूसरे स्थानों पर पलायन करना पड़ रहा है। यदि तालाब निर्माण का कार्य मजदूरों से कराया जाता तो गांव के अनेक परिवारों को रोजगार मिल सकता था, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के चलते मशीनों से कार्य कराकर मजदूरों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

ग्रामीणों ने जेसीबी मशीन से हो रहे निर्माण कार्य का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया है और मीडिया को भी उपलब्ध कराया है। उनका कहना है कि इससे पहले भी एक तालाब का निर्माण मशीनों से कराया जा चुका है तथा अब दूसरे तालाब में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही थी। विरोध के बाद कार्य फिलहाल अधूरा पड़ा हुआ है, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है

मिलीभगत के आरोप

सूत्रों के अनुसार, रेंजर तोलाराम हटीला और डिप्टी रेंजर तारसिंह भाभर के संरक्षण में मशीनों से तालाब निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर मशीनों से कार्य कराकर सरकारी योजनाओं की मंशा पर पानी फेरा जा रहा है।

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा मनरेगा के नियमों के अनुरूप तालाब निर्माण का कार्य स्थानीय मजदूरों से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अगले अंक में पढ़िए रेंजर हटिला की हठधर्मिता ओर डिप्टी रेंजर तारसिंह भाभर का अवैध कब्जा ….!!

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