भियां सभी को राम राम…!
लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ…!
भियां न काला हुं न काले कारनामें करता हुं… इसलिए ठोक बजा कर के रिया हुं… भियां चुनाव प्रभारी किशोरजी… ये जो सफेद पोश काले भाई साब को लेकर तुम जो घुम रिये हो… वो और उसके चटरगुल्ले बडे नासुर है… ये इतने मिठे है पीछे भी घुम जायेगे… और परोस देगे… और चंद रूपयों के खातिर अपने आप को बेच भी देगे… झुठ के रिया हुं… तो भानु से पुछ लियो… कि कैसे काले भाईसाब और उसके चटरगुल्लों ने भानु को चुनाव हरवाया… वां भी आये थे.. पर नागर के सामने ये ताड के नीचे ताडी पीते ही रे गिये… जिस भाजपा को ये अपनी मां केते है और अपनी दुकानदारी चलाते है उसी भाजपा की पीठ में ये बार बार चुरा भोकते आये है… इनका बस चले तो ये रूपयों के खातिर किसी को भी बेच दे… इतने बडे बनेंगे कि चुनाव में इनके जैसा मेनेजमेंट कोई नी कर सकता.. बस दो तीन गांव के नाम ऐसे याद कर रखे है कि पुरा गांव इनके केने पर चलता हो… और वां इनको कोई जानईज नी रिया है…। झाबुआ में भाजपा का पीछने का कारण क्या है… पीछले, नगर पालिका, विधायक, पंचायत, मंडी के चुनाव का रिकार्ड देख लियो… पता चल जायेगा कि ये भाजपा के कितने सर्मथक है… इसलिए अभी से के रियो हुं ये जो आगे आगे घुम रिये है और फोटो खिचवा रिये है इनकी परछाई भी प्रत्याशी पर पडने मत देना… अगर चुनाव जीतना हो तो… अगर नी जीतना हो तो फिर वैसा करों… ये कब विरोधी दल में घुस कर भाजपा में संेध मारेंगे ये कुछ के नी सकते…।
अब जा रिया… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं… भले तुमारे पुराने संबंध हो किशोरजी… पर ये मोदी जी का चुनाव है… और ये बडे नासुर है… जिस थाली में खाते है उसी थाली में छेद करते है… और अपने अपने अस्तित्व की तलाश में अब तुमकों पकडा है… क्योकि जिले में इनकों कोई पुछईज नी रिया है… अब जा रिया… जय राम जी की…!