आपका भियां निकलेश डामोर
भियाँ राम… राम….
लो भियां मैं फिर आ गिया….
कुछ कही–अनकही के साथ…. भियां कुछ लोग मुंगेरी लाल के सपने देख रिये है… और भियां सपना है… भाजपा जिलाध्यक्ष बनना… ये सपने वो देख रिये है जिनोने भियां अंपनी मां समान पार्टी को चिन्न भिन्न कर दिया…. इन्होने एक समय भाजपा के राज में बस भियां ख…प…च के अलावा कुछ नी किया… इनकु बस रूपया दिखा… इन्होने चाहे विधानसभा चुनाव हो, लोकसभा हो… या फिर झाबुआ विधानसभा चुनाव हो… भाजपा की लुटिया ही डुबोई.. इसलियेईज तो भियां भाजपा उपचुनाव में हारी…. सबसे बडे तो भाजपा के लिए नासुर है मित्र मंडल भियां… इन मित्रमंडलों ने भाजपा की रोटी खाई और ढोल विरोधियों का बजाया… एक समय था इन मित्रमंडलों ने नगर पालिका लुट ली… विधानसभा लुट ली… लेकिन जी नी भराया… अब ये मित्रमंडल अपने गुर्गो को तैयार कर रिये है… अब तीसरी ओर अन्ना सपना देख रिया है जिलाध्यक्ष बनने का… जिसने भियां टंकिया में ऐसा गोल किया की एक बडी टंकी बन गई… इसने भी भियां पद पर रेते हुए किसी से सीधे मुंह बात ही नी की… हर किसी से झगडेईज किये… जब पोल खुलती तो लुगाईयों को झगडे करने भेजता है… खैर सपने है सपने देखने का सबकोईज हक है भियां… पर अभी के रिया हुं… अभी भानु ही जिलाध्यक्ष रेगा… सपने देखना बंद करों… क्योंकि अब उपर वालें भी समझ गिये है कि मित्रमंडलों और घोटाले करने वालों को तो बनाना ईज नी है… और बनेगा भी तो वो बनेगा जननी(संघ) का सपुत.. जो जननी की राह पर चलता हो।
तो भियां अब जा रिया हुं… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं… अब वापस आ गिया हुं… इसलिए अब बुरा भी लगे तो दो रोटी ज्यादा खा लियो… और अब आपका भियां वापस आ गिया है… आज थोड़ाईज… अब जा रिया….जय राम जी की….