
Voice ऑफ झाबुआ
हम पहले भी बता चुके है कि जब से भाजयुमो झाबुआ जिला अध्यक्ष कुलदीप चौहान बने है तब से चर्चा में रहने लगे हैं,भाजयुमो की टीम का गठन जिस तरह से होना चाहिए वो नही हुआ और नाही कोई उत्साह कार्यकारिणी में देखने को मिल रहा है,कुलदीप चौहान ने जब जिला कार्यकारिणी घोषणा की थी तभी से जिला पदाधिकारी में नाराजगी देखने को मिल रही है और इसी वजह से झाबुआ में भाजयुमो संगठन का कोई भी कार्य सफल नही हो पाया है हर पदाधिकारी संगठन को नुकसान पहुचाने में लगा है क्योंकि ये पदाधिकारी किसी ना किसी के चेले है इसलिए संगठन में अंदर ही अंदर घुसपैठ देखने को मिल रही है।

कुलदीप की भाजयुमो का चौथा विकेट गिरा
जिला अध्यक्ष बनने के बाद कुलदीप चौहान ने अपनी टीम की घोषणा की थी जिसमे प्रणव परमार,प्रियांश कटारिया ओर कुणाल पटेल तीनो को पदाधिकारी बनाया था ने लिस्ट जारी होते ही देर रात तक इस्तीफा दे दिया था इस्तीफा देने के पीछे पद को लेकर वजह बताया जा रहा है तो वही बिना पूछे ही पद दे दिया गया उसके चलते इस्तीफा दिया गया,वही चौथे विकेट के रूप में जिला सोशल मीडिया प्रभारी राजेश गणावा ने भी अपना इस्तीफा दे दिया है,इस्तीफा देने के पीछे कई मायने देखे जा सकते है वही सूत्रो के अनुसार तीन मंडल या जिला पदाधिकारी इस्तीफा देने को तैयार है हालांकि वो कब देंगे ये भविष्य के गर्त में छुपा हुआ है परंतु इन इस्तीफो के पीछे भाजयुमो मध्यप्रदेश ओर भाजयुमो झाबुआ जिला अध्यक्ष को मंथन करना पढ़ेंगा साथ ही इन इस्तीफो की सूचना ना तो प्रभारी को पता है और नाही संभाग प्रभारी को जो अपने आप मे अलग चर्चा का विषय बना हुआ है?

कुलदीप झेल रहा पदाधिकारी को और पदाधिकारी झेल रहे कुलदीप को?
जिला अध्यक्ष की ताजपोशी होने के बाद कुलदीप चौहान ने अपनी टीम की घोषणा तो करी परन्तु वो उत्साह नजर नही आया जो अन्य जिलों के जिला अध्यक्ष की टीम में देखने को मिला,कुलदीप चौहान की टीम के अधिकतर पदाधिकारी किसी ना किसी सिफारिश से बनाए है तो कोई किसी दबाव के चलते बनाए गए है और दोनों ही स्थिति में कुलदीप पदाधिकारी को और पदाधिकारी कुलदीप को झेलने का काम कर रहे है या यू कहें कि दोनों मिलकर भाजयुमो संगठन को कमजोर बनाने में तुले हुए,मध्यप्रदेश भाजयुमो भी झाबुआ भाजयुमो संगठन की स्थिति से अवगत नही है इसलिए झाबुआ में संगठन कार्य ना के बराबर ही रहा है समय रहते हुए अगर मध्यप्रदेश भाजयुमो अध्यक्ष वैभव पंवार सक्रिय नही हुए तो भविष्य में झाबुआ में भाजयुमो संगठन का खड़ा होना एक चिंता का विषय बन सकता है?