जोबट/वॉइस ऑफ झाबुआ
आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर जोबट में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय छात्रों ने मिलकर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और प्रावधानों के बारे में जानकारी देना तथा उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी परंपरा के अनुरूप हुई। इसके बाद वक्ताओं ने छात्रों को बताया कि भारतीय संविधान के में दिए अधिकार, सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए विशेष प्रावधान के बारे में बताया। साथ ही पाँचवीं अनुसूची और वन अधिकार अधिनियम, 2006 जैसे कानून आदिवासी समाज के भूमि और संसाधनों पर उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं।

वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में शिक्षा, जागरूकता और एकजुटता ही आदिवासी समाज को मजबूत बना सकती है। छात्रों से अपेक्षा की गई कि वे अपनी परंपरा, बोली – बानी और सांस्कृतिक धरोहर को संजोते हुए आधुनिक ज्ञान और तकनीक को भी अपनाएं, ताकि समाज प्रगति की ओर अग्रसर हो सके।
इस अवसर पर निलेश डावर, लालसिंह डावर, मोतेसिंह भूरिया, वीरेंद्र बघेल, राजेंद्र बामनिया और महेश बघेल उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर छात्रों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और समाज में समानता व सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।