विनय पंचाल पिटोल
चांद फतह कर चुके भारत की सडको पर आज भी ऐसे मासूम बच्चे हैं जो दो वक्त की रोटी के लिए जानलेवा करतब दिखाने को मजबूर है | ये तस्वीरे सरकार के उन तमाम दावो को आइना दिखाती है जिसमे सरकारे मासूम बच्चों को शत-प्रतिशत स्कूल भेजने और उनकी निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था का ढिंढोरा पिटती नजर आती है |

खेलने-कूदने और पढ़ाई-लिखाई की छोटी सी उम्र में बच्ची मौत के खेल का करतब दिखाने को मजबूर हैं | 8 से 10 फीट की ऊंची रस्सी पर चलकर बच्चि ने हर किसी को दांते तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया | पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करने वाले नट परिवार के इन बच्चो का करतब ही परिवार की आजीविका का साधन है |करतब दिखाते ये भाई बहन सिद्धू और सावली छत्तीसगढ़ से आये थे ।

लकड़ियों के सहारे रस्सी पर मौत का खेल
मौत का खेल शुरू करने से पहले तमाश दिखाने वाले नाबालिक भाई बहन ने सड़क किनारे किले ठोकी , लकड़ियों के सहारे रस्सी बाँधी और उसी रस्सी पर बहन को चडा दिया | रस्सी को मासूम बच्ची एक हाथ में डंडा लेकर हिलाती रही, कभी तेज तो कभी धीरे, कभी सीधा चली तो कभी उल्टा, कभी जंप किया तो कभी कमर हिलाइ | हैरतअंगेज करतब देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड लग गई | मौत का खेल आगे भी जारी रहा | बच्ची ने एक बार तो सर पर लोटे रख रस्सी पर स्टील की थाली पर चलते हुए जो संतुलन बनाया लोगो को हैरान कर दिया | एक रस्सी पर करतब दिखाती छोटी-सी बच्ची को देख आस-पास से गुजरने वाले लोग थोड़ा रुक कर देखने के बाद जेब से कुछ पैसे निकाल कर बच्ची को दे देते हैं |

हर पैसे लेकर आने वाले को देख कर भाई बहिन का उत्साह और करतब ज्यादा जानलेवा होता गया लेकिन ये बच्चे इसी प्रकार जीवन यापन को अपना भाग्य मान चुके है । जिन्हें गिरने का डर नहीं है… क्योंकि पैसे कमाना है , आसपास के लोग इस नजारे को मनोरंजन समझ रहे थे | लेकिन शायद ही किसी को इसके पीछे की मजबूरियां और रोटी जुटाने की जद्दोजहद समझ आई हो |ऐसा भी नहीं है कि शहर शहर गांव-गांव जाकर करतब दिखाने वाले इन बच्चों की खबर शासन-प्रशासन को नहीं है पर इन्हें ऐसा करने से रोकने वाला कोई नहीं है |