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जहाँ हँसी भी थी, सीख भी—प्रेमाशिष विद्यालय का यादगार वार्षिकोत्सव खेल, कला, मंचन और नृत्य में बच्चों की प्रतिभा ने मोहा मन

विनय पंचाल पिटोल 

पिटोल स्थित प्रेमाशिष विद्यालय में वार्षिकोत्सव का आयोजन बड़े ही उत्साह और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “उमंग” रही, जिसे बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दिया। विद्यालय परिसर बच्चों की मुस्कान, रंगीन सजावट और तालियों की गूंज से सराबोर नजर आया।

खेलों ने सिखाया अनुशासन और आत्मविश्वास का पाठ है-जीवन में खेल क्यों जरूरी हैं

वार्षिकोत्सव की शुरुआत खेल एवं शारीरिक गतिविधियों से हुई। बच्चों ने बताया कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क, धैर्य और नेतृत्व जैसे गुणों का आधार हैं। हर खेल में बच्चों की ऊर्जा और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।

संस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बनाया माहौल भावनात्मक-कला और मंचन में दिखी बच्चों की गहरी समझ

खेलों के बाद सोमवार को ज्ञान की देवी मां सरस्वती के पूजन वंदन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हुई, जिसने दर्शकों को भावनाओं के अलग-अलग रंगों से रूबरू कराया। नृत्य, अभिनय और संवाद में बच्चों की मेहनत और अभ्यास साफ दिखाई दिया।

वृद्धाश्रम मंचन ने छू लिया दिल माता-पिता की पीड़ा ने दर्शकों को कर दिया भावुक

वृद्धाश्रम पर आधारित मंचन कार्यक्रम का सबसे मार्मिक क्षण रहा। इसमें दिखाया गया कि आधुनिक और व्यस्त जीवनशैली में कई बार माता-पिता अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं। बुज़ुर्गों की पीड़ा और भावनाओं को देखकर कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

मोबाइल फोन पर आधारित मंचन ने सोचने पर किया मजबूर

ज़रूरत और नुकसान—दोनों पहलुओं को किया उजागर

कार्यक्रम की एक खास प्रस्तुति मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग पर आधारित रही। मंचन में दिखाया गया कि आज बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर उम्र के लोग मोबाइल पर निर्भर हो गए हैं। मोबाइल जहाँ जीवन को आसान बनाता है, वहीं रिश्तों, स्वास्थ्य और आपसी संवाद पर इसका नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहा है—यह संदेश बेहद सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया।

हँसी के रंग में रंगा “तारक मेहता का उल्टा चश्मा”-लोकप्रिय किरदारों ने दर्शकों को खूब हँसाया

गंभीर प्रस्तुतियों के बाद हास्य मंचन ने माहौल को हल्का कर दिया। “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” के किरदारों को बच्चों ने इतने शानदार ढंग से निभाया कि दर्शक ठहाके लगाने पर मजबूर हो गए।

महिला सशक्तिकरण प्रस्तुति ने दिया मजबूत संदेश

नारी शक्ति ही समाज की असली ताकत

महिला सशक्तिकरण पर आधारित प्रस्तुति ने यह स्पष्ट किया कि नारी केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की रीढ़ है। इस प्रस्तुति ने मातृशक्तियों में आत्मविश्वास भरा और पुरुषों में सम्मान की भावना को और गहरा किया।

मुख्य अतिथि ने बच्चों को दिया संस्कारों का संदेश”शिक्षा के साथ संस्कृति जरूरी—राजाराम जी कटारा”

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे राजाराम जी कटारा ने बच्चों को शिक्षा और संस्कारों का महत्व समझाया। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि बचपन में डाले गए संस्कार ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव होते हैं।

पुरस्कार वितरण समारोह में खिले बच्चों के चेहरे मेहनत का मिला सम्मान

अगले दिन आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ नजर आया। सहभोज के साथ हुआ वार्षिकोत्सव का सुंदर समापन पूरे विद्यालय परिवार ने साझा की खुशियाँ कार्यक्रम के समापन अवसर पर पूरे विद्यालय परिवार के लिए सहभोज का आयोजन किया गया। सौहार्दपूर्ण वातावरण में सभी ने मिलकर इस यादगार आयोजन का आनंद लिया।

“उमंग” बना यादगार अनुभव संस्कार, प्रतिभा और उत्साह का सुंदर संगम

प्रेमाशिष विद्यालय का यह वार्षिकोत्सव केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि बच्चों की उमंग, शिक्षकों की मेहनत और संस्कारों की मजबूत नींव का प्रतीक बनकर सामने आया।

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