झाबुआ। नगर में कई ऐसे सुदखोर है जो चोरी का माल खरीद खरीद कर रसुखदार बन बैठे है…. जो अपने काले धन को सफेद करने के लिए राजनैतिक संगठनों या फिर समाज सेवी संस्थानों से जुडे हुए है…. और अपने आप को सफेद काॅलर वाले बताते है… दिनेश और नीलेश तो ठिक दिनेश की ही गली में रहने वाला एक सुदखोर है मही- काल जो कागजों का काम करते है सुदखोर बन गया… माडु में एक जमीन में गढे धन का मामला हुआ था… जिसमें से बडी मात्रा में धन मही-काल ने खरीदा था… पुलिस यहां आई भी… लेकिन पुलिस ने मही-काल को नही… जिन्होने 100 ग्राम… 50 ग्राम सोना खरीदा था उसे ही पकडा था… क्योकि मही-काल का रिश्तेदार पुलिस का आला अफसर था… ये घटना तो ठिक… महाराष्ट्र से भी कुछ लुटेरों ने लुट का सामान भी इसे ही बेचा था… पुलिस आई और इसे उठाकर भी लेकर गई… अब क्या कहें चोरी का माल खरीद खरीद कर रसुखदार बन बैठे मही-काल को पुलिस पकड कर सिर्फ मामला ही सेट कर सकती थी… सिद्धेश्वर काॅलोनी की बगीचे की जमीन पर भी इसकी नजर पडी है… जिसे ये अपने साथियों के साथ मिल हथियाना चाहता है… सुदखोर के साथ साथ मही-काल भू माफिया और शिक्षा माफिया भी है…. अपने काले धन और काले कारनामों को छुपाने के लिए इसने अपने ही बेटे को मातृ शक्ति संगठन और सामाजिक संगठनों से जोड दिया है… और शिक्षा का एक बडा माफिया बन बैठा है…. ऐसे लोग सामने कुछ ओर ओर पर्दे के पीछे कुछ ओर होते है… ऐसे आसामाजिक तत्वों पर भी प्रशासन की नजर होनी चाहिए जो समाजसेवी बन लोगों को लुट रहे है।
जीतु…. सुत्रों का कहना है कि यादव इलेक्ट्रीक्स पर झाडु पोछा करने वाले जीतु… भी कुछ कम नही है… यहां से इसने सामानों की हेराफेरी करना चालु किया… यादव इलेक्ट्रीक्स का काम बडा था… तो कुछ पता नही चला… लेकिन चोरी कभी छुपती नही और एक न एक दिन सामने आ ही जाती है… फिर ये देवझिरी वाले के यहां पहुंचा… यहां भी इसने कुछ कम खेल नही खेला…. फिर आया ये खत्री मोबाईल पर… लेकिन सीधे साधे शशिकांत खत्री को इसने अपना शिकार ऐसा बनाया कि उसे कर्जे में डुबो कर रख दिया… सुत्रों का कहना है कि एक बार किसी ने खत्री मोबाईल से 4 मोबाईल खरीदे… एक दिन शशिकांत खत्री ने खाता चेक किया तो उस व्यक्ति ने मोबाईल की राशि का भुगतान नही किया था….तो शशि भाई ने उसे काॅल करके भूगतान करने को कहा… सामने वाले व्यक्ति ने कहा भूगतान तो मैने पुरा कर दिया है बिल भी मेरे पर है… वहां से जीतु की हेराफेरी सामने आई… दुकान के फर्नीचर में भी इसने लाखों का खेल खेला… अलग होकर ससुर के नाम से खुद ने सुदखोरी… सटटा… और क्रिकेट सटटे का काम चालु कर शशिकांत को अपने जाल में फंसा कर कर्जदार बना दिया… उसी का पैसा उसी को कर्ज के रूप में दिया और डरा धमका कर ले ली आखिर कार शशिकांत की जान… सुत्रों की माने तो खुद के भाई को भी जीतु ने इतना प्रताडित कर दिया था कि उसे भी जान से हाथ धोना पडा…. सुत्रों तो ये भी बताते है अपने ही रिश्तदार के यहां सेंध मार एक महिला के साथ अवैध संबंध बनाए…
सुना है विक्की, दिनेश, नीलेश, जीतु, ललीत और सुभाषचंद्र झोझा को भाजपा के कुछ बडे पदाधिकारी बचाने में लगे है… जो चंद रूपयों के खातिर इन सुदखोरों को संरक्षण दे रहे है… ऐसे पदाधिकारियों के चेहरे जल्द ही हम उजागर करेंगे… इन भाजपा पदाधिकारियों के दबाव के कारण ही पुलिस इन सुदखोरों को पकड नही पा रही है।