परिवेश पटेल रायपुरिया
झाबुआ जिले के काम की तलाश में हजारों लोग अन्य राज्यों में पलायन कर चुके हैं, लेकिन इन लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज है। यदि ये लोग वोटिंग नहीं करते हैं, तो मतदान प्रतिशत गिर सकता है। काम धंधे की तलाश में हजारों लोग झाबुआ जिले से पलायन सूरत,मारेवी, बड़ोदरा अहमदाबाद गुजरात तो कोई राजस्थान, यूपी के शहरों में जाकर मेहनत मजदूरी कर रहा है। कई गांव तो ऐसे हैं जहां घरों में ताले डले हुए हैं और लोग दूसरे शहरों में परिवारों सहित चले गए हैं।

अब समय नजदीक आ गया लोकसभा चुनाव का जिला प्रशासन मतदान के प्रति लोगों को कई आयोजनों के माध्यम से जागरूक कर रहा है। लेकिन पलायन कर गए लोगों का क्या सैकड़ों लोग ऐसे हैं जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं लेकिन वह काम काजी के लिए अपने गांवों को छोड़कर पलायन कर गए हैं। अगर जिले में पलायन के हालात नहीं होते तो मतदान का ग्राफ और ऊपर जा सकता है अधिकतर गांवों में 15 से 20 प्रतिशत लोग कर चुके पलायन जिले में पलायन के हालात सालों पुराने हैं। सरकारें आईं और गईं लेकिन झाबुआ जिले के लोगों को काम धंधा बेहतर रूप से नहीं मिल सका। सूखी जमीनें और प्यासे खेतों के कारण सैकड़ों लोग घर छोड़ने पर मजबूर होते रहे हैं। साल में आठ महीने यह मजदूरी करने चले जाते हैं जहां से मजदूरी कर लौट आते हैं। लेकिन 15 से 20 प्रतिशत पलायन करने वालों में आधे लोग लौटते ही नहीं है।