भियां राम… राम… लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ… भियां विधानसभा चुनाव आतेईज… बरसाती मेंढक की तरह कई दावेदार पैदा हो गिये थे… कोई अपनी गिरेबां में झाक कर नी देख रिया था… अब अस्तित्व तलाशते सफेदपोश काले भाई साब… इन सब के मास्टर माईड बन गिये और अंदर ही अदंर खेल खेलने लग गिये… और सामने सति सावित्री बन गिये…! अब इसी बीच हाथ छाप से भगोडे… चुराना को टेमपेरी के लिए जिले का मुखिया बना दिया…अब वो केते है नी कुत्ते की पुंछ को सौ सालों तक भूंली में रख लियो… वो टेढी की टेढी रेगी….. वैसेईज कुछ हाथ छाप से भगोडे चुराना और काले भाईसाब ने किया… और अपने गुर्गे को भानु के सामने खडा कर दिया… जो मंचों पर केता नजर आया है… सफेदपोश काले भाईसाब गुरू है… अब पीठ में चुरा भोकने की इनकी आदत ही है… अब भियां… बीबी के पल्लु के पीछे छुप खेल खेलने वाला…. चौथी बीबी का सपना देखने वाला….. एक बेवडा… और छात्रावास में हवस की प्यास बुझाने वाले और कुछ ओर…. हाथ छाप से भागा हुआ भगोडा चुराना भानु को निपटाने के लिए नित नये जनत करने लग गिये… बडी बात तो है इसमें मास्टर मांईड काले भाई साब है… जो अपना अस्तित्व तलाश रिये थे… इनको जा वाले मामला होने के बाद सुखे अंगुर के साथ छात्रा के वासों में टुकुर…. टुकुर… लगाई लगाई… करने भी नी मिल रिया था… अब भानु आ गिया तो काले भाई साब की पुरी दुकानदारी ही बंद हो जायेगी… ऐसे में हाथ छाप के कांति से पेलेईज इन्होने सेटिंग कर ली… जैसे पिछले चुनाव में की थी… और रात 2 बजे काले भाईसाब… चुराना… और एक तीसरा कांति भूरिया के घर से निकले थे… इस बार भी इन्होने ऐसाईज किया है और सौदा नगर पालिका से किया है… भगोडा चुराना भी कुछ कम नी है… जब चिंदिया आया था… तो झंडे लगाने के लिए किमडियों के भी पैसे नी दिये थे… अब इनके खेल को तो सब समझ गिये.. तो इन्होने काले काले भाई साब के गुर्गो से बाते उडवाना चालु की मंडलों कंमडलों के लोग काम नी कर रिये… भानु और इनके बीच में नोक झोक हो री है… असल में प्रदेश के अध्यक्ष आने थे तो चुराना और काले भाईसाब की और गुर्गो की शिकायत मंडल कमंडल वालों ने नी वो तो काम कर रिये है लेकिन ये खेल खेल रिये है। अब भियां… इनकी कई रोचक कहानी है… चुराना को तो घर से धक्के मार कर बहार निकाल दिया… बीबी के पल्लु के पीछे छुपने वाले की बीबी को कोई और पेल रिया… चौथी बीबी का सपना देखने वाले की तीसरी बीबी दुसरे के साथ भाग गी… ये सब बाद में बिताउंगा…। अब जा रिया… लेकिन जाते जाते एक बात बिता दुं… भियां अब तो शर्म कर लो.. कब तक पार्टी से दगा करते रोगे… अभी मौका मिला है… आगे बढों.. भियां सबको मालुम है… तुम क्या कर रिये है… अभी भानु को निपटा दोगे… अगली बार तो कुत्ता भी नी पुछेगा… और भगोडे चुराना तुमारे तो भोत मामले है एक एक कर बहार आ गिये.. लोग थुकेंगे.. अगली बार आंउंगा ने तो चुराना का बेटा नग्गा होकर क्या कर रिया था.. वो बिताउंगा… अब जा रिया… जय राम जी की…!
किसी की हवस की प्यास नी बुझ री छात्रा के वासों में….! तो कोई बीबी के पल्लु छुप खेल रिया सारे खेल…! भानु के आतेज शराब… शबाब… के खेल हो गिये थे बंद…! पिछले चुनाव में काले भाईसाब… चुराना… और एक अन्य गिये थे कांति के घर इस बार भी वैसा खेल …! गुर्गो से मंडलों की उडवा रिये है झुठी बातें और मंडलों ने की इनकी शिकायत…!
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