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जिले के जोबट में होने जा रही है छः गांवों में खदानों की नीलामी, क्या क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि है अनजान या जानबूझकर ग्रामीणों के विरोध के बाद भी अनजान बन बैठे है जनप्रतिनिधि

 

अलिराजपुर दिलीप सिंह भूरिया

अलीराजपुर जिले का संपूर्ण क्षेत्र आदिवासी बहुल और पेशा एक्ट, पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आता है तो बिना जिले के जन प्रतिनिधियों और सांसद विधायक जिला पंचायत सदस्य और जनपद सदस्य, सरपंच, पंच और चौकीदार, ग्रामों के तड़वी और पुजारा और ग्राम के ग्रामीणों की राय जाने बिना जिले के मुख्यालय से अचानक सरकारी आदेश केसे निकल जाता है? क्या इन इन गावों की भूमि को खदान बांध और फैक्ट्रियों के लिए किसी भी निजी संस्था या व्यक्तियों को आवंटित कर दी जाती है। क्या सरकार जिले के किसी भी व्यक्तियों की राय नहीं लेती जिससे ग्रामीणों और जिला प्रशासन और सरकार के बीच में हमेशा टकराव बन रहा है, कई परिवार इस एकतरफा निर्णय के कारण विस्थापित हो जाते है या पूरे के पूरे परिवार अपनी रोजी रोटी की तलाश में इधर उधर घूम घूम कर उनका परिवार दरिद्र होकर जीने को मजबूर हो जाता है। जिले के जोबट तहसील और आजाद नगर भाभरा के कई इलाकों को खदानों और फैक्ट्रियों के लिए बिना ग्राम सभा की अनुमति के आवंटन करना जिले के सांसद और विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों की खुली मिलीभगत की ओर इशारा है। क्योंकि जब जब भी भूमि खदान के लिए या फैक्ट्रियों के लिए आवंटित हुई और ग्रामीणों द्वारा आंदोलन या विरोध होने पर विधायक या सांसद जेसे कोई भी जनता के सेवक नजर ही नहीं आते और ना ही उनकी ओर से कोई भी ऐसी शासकीय आवंटन प्रक्रिया को रूकवाने के लिए भी प्रयास तक नही किया जाता, और न ही जनता को विस्थापन नही होने देने का आश्वासन दिया जाता है, विशेष सूत्रों से जानकारी नाम नही बताने की शर्त पर जानकार अधिकारी ने बताया कि बिना सांसद और विधायको के हस्ताक्षर के बिना जिले के किसी भी क्षेत्र की एक इंच भी जमीन को कोई भी एसडीएम या जिला कलेक्टर आवंटित नहीं कर सकते ।नेताओ और विधायको और सांसद की मिली भगत से ही भूमि आवंटित होती है। जिले की ग्राम सेजावाड़ा में भी ग्रेनाइट की खदान में ऐसी ही प्रक्रिया में जिले के सांसद और विधायको के हस्ताक्षर होने के बाद ही उनके चाहते व्यक्तियों को फैक्ट्रियों और ग्रेनाइट की खदान का आवंटन किया था, जबकि वह भूमि पशु चारागाह है। जहा से ग्रामीण आदिवासी अपने पालतू पशुओं के लिए चारा काटकर हमेशा से खिलाते आए है। क्षेत्रीय विधायक इस वक्त स्वस्थ नहीं है उपचार के दौरान राज्य से बाहर है लेकिन उनके पुत्र विशाल रावत ने भी इस मुद्दे को लेकर कोई स्पष्टीकरण नही दिया और ना ही क्षेत्रीय सांसद गुमान सिंह डामोर ने भी कोई स्पष्टीकरण नही दिया है।

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