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श्री सम्मेद शिखर जी तीर्थ जैनियों की पावन भूमि है -मुनिराज पियूषचंद्र विजय जी,तीर्थ को बचाने के लिए जैनियों को शस्त्र भी उठाना पड़े तो गलत नहीं है- मुनिराज पीयूषचंद्र विजय जी

पियूष राठौड़ झकनावदा

झकनावदा – ज्योतिष सम्राट मोहनखेडा महातीर्थ विकास प्रेरक आचार्य प्रवर श्री ऋषभ चंद्र सुरीश्वर जी महाराज साहब के शिष्य मुनिराज पीयूषचंद्र विजय जी महाराज साहब पेटलावद से उग्र बिहार कर झकनावदा पहुंचे। जहां मूलनायक भगवान श्री केसरिया नाथ भगवान के दर्शन वंदन कर श्री केसरिया नाथ जैन धर्मशाला में स्थिरता रखी। वही जैनियों की ह्रदय स्थली पावन तीर्थ श्री सम्मेद शिखरजी पर जो पर्यटक स्थल बनाने की सांसद द्वारा जो टिप्पणी की गई। उसको लेकर झकनावदा से जैन पत्रकार मनीष- शेतानमल कुमट (जैन) ने मुनिराज पीयूष विजय जी महाराज साहब से विशेष चर्चा की। जिसमें मुनिराज ने मीडिया से चर्चा में बताया कि श्री सम्मेद शिखरजी तीर्थ जैनियों की एक पावन भूमि है जहां झारखंड सांसद द्वारा जो तीर्थ को पर्यटक स्थल बनाने की बात कही है उससे जैन समाज को आघात पहुंचा है। देशभर के संपूर्ण जैन समाज को इस हेतु अपने अपने क्षेत्रीय सांसद, विधायक, मुख्यमंत्री, तहसीलदार, एसडीएम,थाना प्रभारी,चौकी प्रभारी आदि को माननीय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नाम ज्ञापन सौंपना चाहिए जिसके माध्यम से यह तीर्थ पर्यटक स्थल बनने से रुक सके। यदि माननीय नरेंद्र जी मोदी इस फैसले को निरस्त नहीं करते हैं तो संपूर्ण जैन समाज एकजुट होकर संसद का घेराव करेगा। इसके साथ ही मुनिराज ने कहा कि सभी जैन संतो को एकजुट होकर दिल्ली की ओर विहार करना चाहिए व अपने तीर्थ को बचाने के लिए आगे आना चाहिए। इसके साथ ही मुनिराज ने कहा कि मैं भी अगर यह फैसला वापस नहीं किया गया तो दिल्ली की और उग्र विहार कर आमरण अनशन पर बैठूंगा वह चाहे इसमें मेरी प्राणों की आहुति क्यों न देना पड़े।

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