भियां सभी को राम राम……!
लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ….!
भियां वो केते है नी… जब मती मारी जाये…तो भियां आदमी कुछ भी कर रिया होता है…. ऐसेईज आज मैं आपकु काले भाईसाब और मंत्रीजी की प्रियशी रसभरी की कहानी सुनाने जा रिया हुं… भियां अस्तित्व तलाशते काले भाईसाब… को हर जगह से नकारा जा रिया है… अब अब सफेद पोश काले भाईसाब जाये तो कां जाये… तो भियां काले भाईसाब ने मंत्रीजी की प्रियशी रसभरी का दामन थामा… किसी को निपटाना हो… कोई काम नी हो रिया हो तो ये भियां रसभरी को मंत्री के पास भोपाल मंत्रीजी को परोस देते है और अपना काम निकलवा लेते है… अब मंत्रीजी भी रसभरी का रसपान करते है… तो सारे काम हो जाते है…!
अभी भियां अब घुमा फिरा के नी… अब सीधे सीधे बिता रिया हुं… जा साब को फंसानें में पुरा खेल इनकाईज है… भियां सफेद पोश काले भाईसाब का एक मित्र मंडल है… जहां सबको ये बेन तो केते है… लेकिन दिन में भैया रात में सैंया वाला काम चल रिया है… इनके मित्र मंडल में इसकी बीबी उसकी सेटिंग… उसकी बीबी इसकी सेंटिग चल रिया है… और मां के दरबार में अपनी आंखों से ही ये अपनी हवस की प्यास बुझा लेते है… और दुसरे की लुगाईयों को लुभाने कभी मटकते है… कभी गोलियां चलाते है… अब भियां ये सफेद पोष काले भाई साब जिसको पेले बेन केते थे… उससे ही अपनी हवस की प्यास बुझाते है… इनकी प्रियशी सुखा अंगुर… इनती भ्रष्ट है कि पेले भी इसने जा साब की तरह भाभर साब पर भी आरोप लगाया था… इनका खेल भियां छात्रा…. के…. वासों में बियर पीने वाले मामले से चालु हुआ… और सरकार के प्रति इनकी बेमानी उजागर होने लग गी…. अब भियां जा साब ने भी इनकी चोरी पकड ली… कार्रवाई की तैयारी थी.. ये जा साब को माफ कर दो… माफ कर दो उल्झाते रिये… और उधर काले भाईसाब और मंत्रीजी की प्रियशी ने मंत्रीजी के मार्फत खेल खेला… खेल भी ऐसा कि छोटी छोटी बच्चियों को अपना हथियार बनाया… अब बात मंत्री को उनकी प्रियशी रसभरी के आदेश की थी.. और रातोरात पुरे प्रशासन पर दबाव डाल दिया… हर बार कि तरह रसभरी ने दबाव बनाने के लिए युवाओं को आगे कर दिया…. और युवा विरोध करने लग गिया… ये उसी तरह हुआ… जैसे अंकुर और गुमानसिंह के लेटर पेड पर विरोध हुआ… इसके पीछे भी रसभरी का हाथ था…. लक्ष्मण सहित गुमान अंकुर के पुतले जलाये गिये… इस बार भी अपने हितों को पुरा करने के लिए भियां रसभरी ने युवाओं को आगे अपना हित पुरा कर लिया… मंत्रीजी भी क्या करते रसभरी उनकी हवस की प्यास बुझाती है… उन्होने इतना दबाव बना दिया कि रातों रात सब कुछ हो गिया… अब अचानक से जा साब सलाखों से बहार आ गिया… ये घबरा गिये… और इन्होने भानु और गुमान के संबंधों को लेकर प्रोपोगंडा किया… कि भानु के जा से अच्छे संबंध है… गुमान और भानु में आपसी मतभेद है… बात काले भाईसाब में अपने एक गोटे बिल्लु से करवाई… ताकि लोगों का ध्यान भटक जाये… लेकिन वो केते है नी… सांच को आंच नही… ऐसाईज कुछ जा के साथ हुआ… बहार आते ही सारे खुलासे हो गिये…. अब भाई साब के सुखे अंगुर के कामों की जांच की जाये तो सारा दुध का दुध और पानी का पानी हो जायेगाा… वैसे भी कई मामले सामने आने वाले है… जिससे ये सब चौक जायेंगे… वो बाद में बिताउंगा..!
अब भियां मंत्री की रसभरी की बात करें तो… मंत्री जी जब से जिले में आ रहे है… तब से रसभरी फाम में आ गी है… अपने पद पर बैठने के लिए भी इसने खुब खेल खेले थे… अब जो लोगों में ये जानने की जिज्ञासा हो गई है… कि मंत्री जी जब भी यां आते है…. रसभरी के घर चाय पर क्यों जाते है… अब मंत्रीजी की खासम खास प्रियशी है रसभरी …. फिर क्या… ये खेल भी इसलिए हुआ अगर कार्रवाई होती तो बुढे प्रेमियों के प्यास बुझाने के अडडे बंद हो जाते… अब मंत्री भी एक चू…. के चक्कर में फंस गये… इसका खेल भी निराला होता है… इसलिए उन्हें गलत को भी सही कर जा साब के उपर कार्रवाई करवानी ही पडी… एक दिन देखना मंत्री जी का भी ऑडियों वीडियों काम नही होने पर ये काले भाईसाब का मित्र मंडल करेगा… और रसभरी कहेगी मेरा शोषण हुआ… बाकि अगले अंक में बिताउंगा…।
अब जा रिया हुं… लेकिन जाते जाते एक बात के दुं… शरम आनी छीये रसभरी और मित्र मंडल के पतियों को कि उनकी पत्नियां उनकी बजाय दुसरों को रस पान करा री है… और भियां एक बात और कुं… यूवाओं के लिए समझ जाओं… और इन हवशियों के खेलों का शिकार मत बनो… ये तो भाई बेन बन कर भी अपनी हवस की प्यास बुझा रिये है… अब जा रिया… जय राम जी की….!