
सुनिल डामर
सेमलिया में तेजा दशमी हर्षोल्लास एवं बड़े ही धूमधाम से मनाई गई।डीजे के साथ गांव में चल समारोह निकाला गया।मन्नत धारियों ने रंग-बिरंगे निशान चढ़ाकर अपनी मन्नत ऊतारी।चल समारोह में मन्नत धारी हाथ में निशान लेकर चल रहे थे।चल समारोह खेड़ापति हनुमान मंदिर से आरंभ होकर गांव के मोहल्लों,मुख्य मार्ग होता हुआ बामनिया रोड़ तेजाजी मंदिर पहुंचा।जहां पर जहरीले जानवर के काटने वालों को तेजाजी के नाम से तातीं बांधी जाती है।वह भादवा माह की बड़ी दशमी को तोडी जाती है।कहते हैं कि कोई भी जहरीला जानवर काटने से तेजाजी के नाम से तातीं बांधने से उस जीव को जहर का असर नहीं होता है।ग्रामीणों ने तेजाजी महाराज के मंदिर पर पहुंचकर दर्शन लाभ लिया। मंदिर पर दिनभर भारी भीड़ लगी रही।इस दिन ग्रामीण आदिवासी समाज अपनी खेती का कार्य नहीं करते हैं।और सभी उपवास कर तेजाजी मंदिर पर नारियल आदि चढ़ाते हैं। तेजा दशमी के पहले अष्टमी और नवमी को तेजाजी मंदिर पर रात्रि में तेजाजी की कथा का भव्य आयोजन प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी किया गया।मंदिर पर व्यवस्था की कमान व तेजाजी मित्र मंडल के सदस्यों ने संभाल रखी थी।