HomeUncategorizedवाह सीएमएचओ यहाँ भी खेला...!

वाह सीएमएचओ यहाँ भी खेला…!

झाबुआ / निकलेश डामोर

ये क्या चर्चा गलियारों में चल रही है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को अपने बच्चे पालने के लिए खूब खेल करने पड़ते है.. तब जाकर इनके बच्चों के पेट की भूख मिटती है.. क्योंकि इन बेचारों को सरकार जो तनख्वाह देती है वो इन्हें काम पड़ती है किस ही वजह से इन्हें कागजों में हेराफेरी कर अपने बच्चों को पालना पड़ता है।
जी हां इन दिनों जिला स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बड़े ही सुर्खियों में जिनके भ्रष्टाचार के किस्से गली गली में फेमस हो रहे है उनके भ्रष्टाचार की गाथा हम नही जिले की जनता चर्चा करती नजर आ रही है।इन दिनों जिले में हुवे वाहन टेंडर बड़े सुर्खियों में है इसमे भी ठाकुर साहब ने खेला किया।
सूत्रों की माने स्वास्थ्य विभाग झाबुआ में वाहन अटेंज का टेंडर की विज्ञप्ति प्रकाशित हुई ये विज्ञप्ति कब और किस अखबार में प्रकाशित हुई ये किसी को पता नही पता है तो वाहन मालिक कपिल , ठाकुर साहब, मनीष ओर अभिषेक को पता थी और किसी को नही , अपने चहेते कपिल को टेंडर दिलवाने के लिए शर्ते भी ऐसी रखी गई कि कोई पूरी नही कर सकता था
.. पहली बार मे टेंडर निरस्त हुआ वो भी इस लिए क्योंकि झाबुआ के लोगो ने भी टेंडर डाला था उन्हें ये कहा गया कि टेंडर डालने वाले के पास खुद की 10 गाड़ियां होनी चाहिये वो भी 2 साल से ज्यादा पुरानी न हो… ओर मालिक का 50 लाख से अधिक का टर्न ओवर हो.. फिर क्या था टेंडर निरस्त हो गया दूसरी बार फिर विज्ञप्ति निकली इसका भी पता नही चला कब और किस अखबार में प्रकाशित हुई। अब समय था अपने चहेते कपिल को टेंडर देने का तो सूत्र बताते है कि सीएमएचओ साहब ने रात के अंधेरे में स्वयं स्टोर में जाकर टेंडर खोला कपिल के दस्तावेज भी पूरे नही थे उन दस्तावेजों की तुरंत सीएमएचओ साहब के निर्देश पर मनीष ओर अभिषेक ने पूरी की.. बड़ी बात तो यह भी है कि कपिल ने टेंडर के समय 1-1 लाख की जो डीडी लगानी थी वो भी नही लगाई अब साहब का चहेता है तो सब चलता है.. और तो और कपिल के पास खुद की 10 गाड़ियां नही थी इन्होने 10 फर्जी गाड़ियों के नम्बर लगा कर टेंडर प्राप्त किया इन ही गाड़ियों के नम्बर इन्होने धार, मंदसौर, देवास नीमच मे दिये,420 है ऐसा कार्य करना जिन गाड़ियों के बिल लगते है वो सारी गाड़ियों के नंबरों से ऑनलाइन देखा जाए तो सभी गाड़ियां दूसरे दुसरो के नाम की है तो इन भ्रष्ट खिलाड़ियों ने झाबुआ के वाहन मालिकों के सामने अलग नियम कायदे क्यों रखे ओर दूसरों को कहा 2 साल पुरानी गाड़ी ना हो मगर कपिल की तो उससे भी पुरानी गाड़ियां है अब पहले जो टेंडर हुवे थे उन्हें वाहन किराया 19500 रुपये था मगर अब साहब का चाहेंता है तो किराया भी बढ़ गया अब वाहन किराया 29300 रुपये कर दिया। नियत यह था की कपिल ने जो गाड़ियों के कागज आरसी बुक जमा कर टेंडर लिया वह गाड़िया एक भी नहीं चल रहीं इसका मतलब है सब गोलमाल है!कपिल साहब ने यहाँ पर दुसरो की गाड़िया लगाई है उनको इस 29300 ( RBSK)रुपये मेसे कपिल जिनकी गाड़ियाँ है उन्हें 24000 रुपये देता है और बचे 5800 रुपये कमीशन है जो सीएमएचओ साहब. मनीष ओर ठेकेदार में बटते है। उसी प्रकार BMO वाहन के लिए कपिल को 25000 मिलते वह दुसरो को 20000 रुपए देता है यहाँ भी 5000 हजार का प्रति गाड़ी कमीशन,अब आप लोग ही बताइए कि साहब किस तरह से अपना घर चला रहे है..टेंडर कमेटी भी इसमें सरिक हें क्योंकि नियम को उन्होंने नियमों को ताक पर रख कर कार्य किया बाकी अगले अंक में… ओर भूलियेगा नही अभी विवेक की गाथा भी बाकी है… वे किस तरह से लोकल दवाइयों का टेंडर न हो कर स्टोर के माध्यम से दवाइयों का बड़ा घोटाला हो रहा है… क्या है कमीशन का खेल अगले अंक में ..सीएमएचओ का भूखे शेर खागये गोली, पिगये सायरप
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