शिवमहापुराण के श्रवण से व्यक्ति की आध्यात्मिक चेतना में दोगुना संचार होता है- पंडित प्रफुल्ल शुक्ला

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शिव अनादि है, जन्म मृत्यु से परे हैं। ब्रह्मा विष्णु रुद्र की उम्र शिव के 1 दिन के बराबर है। सावन माह में शिवमहापुराण के श्रवण से व्यक्ति की आध्यात्मिक चेतना में दोगुना संचार होता है।
यह बाते श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही 15 दिवसीय श्री शिव महापुराण के दौरान पंडित प्रफुल्ल हरिकृष्ण शुक्ला ने कही। आपने महापुराण के अनुसार वृतांत सुनाते हुए बताया कि सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा और विष्णु दोनों के मध्य बड़प्पन को लेकर युद्ध प्रारंभ हुआ। दोनों ने भयंकर अस्त्र प्रकट किए। जिससे प्रलय की संभावना उत्पन्न हो चुकी थी। ऐसी परिस्थिति में उन दोनों के मध्य अग्नि स्तंभ के रूप में ईश्वर प्रकट हुए। तब उन दोनों के भयंकर अस्त्र उसी अग्नि स्तंभ मैं लय हो गए। ब्रह्मा और विष्णु दोनों उस अग्नि स्तंभ की परीक्षा करने को नीचे और ऊपर की ओर गए विष्णु जी को पाताल में ढूंढते ढूंढते कई वर्षों बीत गए। परंतु उसका प्रकट नहीं मिला और ब्रह्मा भी ऊपर को ढूंढने को गए। वहां कुछ ऊपर जाने पर केवड़े का पुष्प टूट कर गिरा था। उसे ब्रह्मा ने अपने दिव्य जल से जला दिया और अपनी और कर लिया और कहा कि विष्णु जी को जाकर कहना कि ब्रह्मा ने इस स्तंभ का अंत ढूंढ लिया। केवड़े ने उसी समय वहां आकर ब्रह्मा जी की हां में हां मिला दी कहां कि ब्रह्मा जी ने अग्नि स्तंभ का पता लगा लिया। केवड़े और ब्रह्मा जी के झूठ को न सहन कर उसी समय अग्नि स्तंभ मैं से ईश्वर प्रकट हुए और उन्होंने विष्णु जी को सत्य आशीर्वाद दिया और अपने से भी अधिक बढ़ाई का वरदान दिया। परंतु ईश्वर के अंग में से एक और भयंकर पुरुष भैरव करके प्रकट हुए। जिन्होंने ब्रह्मा जी का सिर काट दिया जो मिथ्या बोला था और ब्रह्मा को सभी पूजा के अधिकारों से वंचित कर दिया। केवड़े को भी शिव की पूजा से वंचित किया गया। फिर सभी ने ईश्वर की पूजा की और प्रभु ने उस दिन को शिवरात्रि के रूप में प्रख्यात किया। उसी दिन से संसार में लिंग पूजा प्रचलित हुई।

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