करवड़ के इतिहास मे पहली बार एक अनूठी मिसाल नेत्र दान किया

1458

करवड़ से विनोद शर्मा

लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे आगम माण्डोत छह वर्ष की उम्र मै इस दुनिया को छो़ड कर चलें गये 18 जून शाम को आगम माण्डोत अंतिम सांस ली जैसे ही गांव मैं यह खबर फैली तो पूरे गांव में शोक की लहर छा गई ,जैन समाज के लिये अनूठी मिशाल हे की आगम माण्डोत की आंखें दान की गई शंकरा नेत्रालय इंदौर से टीम आई थी तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष तरुण माण्डोत एसबी श्रीमान के प्रयास से यह सफल हुआआगम के पिताजी धर्मेंद्र माण्डोत का कहना हे की

मेरा इकलौता लाडला पुत्र आंखों का तारा आगम तो आज इस दुनिया से विदा हो गया पर मैं चाहता हूं उसके जाने के बाद भी उसकी आंखें दुनिया को देखें मैं उसकी आंखें दान कर दूसरे के जीवन में रोशनी कर उसको अमर बना दूं मैं उसकी आंखों का दान करता हूं
आगम के पिता धर्मेंद्र माण्डोत के इस निर्णय का पूरा जैन समाज अभिनंदन करता है🙏

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here