

विनय पंचाल पिटोल
आओ नया मुकाम बनाओ , दहेज़ प्रथा को दूर भगाओ…..विकसित राष्ट्र की कल्पना ,दहेज़ प्रथा को होगा रोकना……..पर्यावरण बचाए ,बेटी बचाए ,एक विकसित आदिवासी समाज बनाये……..
ये वो सकारात्मक भाव है जो एक शिक्षक भाई ने अपनी बहन की शादी के आमंत्रण पत्रिका में उतार दिए |
भाई कमेश पिता अनसिंह बिलवाल निवासी मांडली बड़ी जो की पेशे से एक शिक्षक है ने अपनी बहन कुमारी शारदा का विवाह आदिवासी समाज में चली आ रही परम्परागत दहेज
दापा प्रथा जिसमे वधु पक्ष वर पक्ष से पूर्व निर्धारित रकम लेता है जो की एक से पांच लाख तक हो सकती है के बजाये मात्र 125 रूपये संस्कृति व रीति रिवाज के तौर पर लेकर बबलू पिता रामसिंह भूरिया निवासी कोकावद ( रामा ) के साथ संपन्न करवाया।बिलवाल द्वारा समाज में जनजागृति व समाज सुधार की पहल की गयी साथ ही परम्परा के नाम पर आंशिक रकम लेकर परम्परा व संस्कृति को भी जीवित रखा | साथ ही मेहमान नवाजी में शराब वितरण भी ना करते हुए सकारात्मक पहल की जिसमे अनावश्यक खर्च पर भी कटोती की | उनके द्वारा की गयी पहल अनुकरणीय है आदिवासी समाज के साथ ही अन्य समाजो के लिए भी प्रेरणादायक है जो परंपराओ को भी निभाते हुए उनमे सुधार की सम्भावना तलाशते है।कमेश द्वारा अपनी बहन के विवाह का आमंत्रण जिला कलेक्टर सोमेश मिश्रा को भी पत्रिका देकर दिया गया वे स्वयं विवाह आयोजन में सम्मिलित होना चाहते थे,किसी कारणवश नही पहुच पाने पर अपने प्रतिनिधि के रूप में कन्यादान व मंगलकामनाओ के साथ झाबुआ तहसीलदार आशिष राठोड को हल्का पटवारी बाबूलाल सोनी को पहुचाया |