झाबुआ। सारे विवादों और रस्साकशी के बाद आखिरकार 13 दुकानों पर जेसीबी का पंजा चल ही गया… जैसे ही दीवार पर जेसीबी का पंजा चला, दीवार भरभराकर गिर गई… अब आप लोग ही सोचिए… ये दुकानें जर्जर नहीं थीं तो और क्या थीं… कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए व्यापारियों को भड़का रहे थे… ताकि गेंद उनके पाले में चली जाए… यहां एक पूंजीपति नहीं, कई हैं… इस मामले से कईयों के मुगालते भी दूर हो गए।
जब करना था विरोध तब सब थे गायब
अब पछताए होत क्या, चिड़िया चुग गई खेत… ये कहावत 13 दुकानों को तोड़ने के संबंध में चर्चा चल ही रही थी, तब न जाने कहां गायब थे और जब पीपीपी मॉडल पास हो गया… सारी कार्रवाई पूर्ण हो गई… न्यायालय ने भी 13 दुकानों के पक्ष में निर्णय न देते हुए… जर्जर दुकानें तोड़ने का निर्णय दिया… ऐसे में कुछ विघ्नसंतोषी लोग विरोध कर रहे हैं… और फलाना-ढिमका कर रहे हैं… इसमें रसूखदार… व्यापारी, मीडिया… बिना हाथ-पैर की बात की जा रही थी… जब विरोध करना था तब गायब थे… अब दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं।

टेंडर हुए नहीं, फिर भी चला आरोपों का दौर
अभी तो सिर्फ दुकानें तोड़ने का निर्णय न्यायालय के माध्यम से हुआ है… अभी तो निर्माण कार्य का टेंडर भी नहीं हुआ… लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर ऐसा चल रहा है कि टेंडर हो गए और दुकानें बनना चालू हो गईं और ठेकेदार दुकानें बनाने का रुपया खा गए… ये आरोप-प्रत्यारोप कोई और नहीं, एक बोतल में बिकने वाला नेता… 100-200 में बिकने वाले पत्रकार… हैं… जो मनगढ़ंत बातें बनाकर लोगों के सामने पेश कर रहे थे… एक पत्रकार तो पत्रकारिता करने की बजाय बददुआ लगेगी कहने लगा… अरे बिन पेंदे के लोटों… यहां एक नहीं, कई पूंजीपति हैं… जो क्षमता रखते हैं एक कॉम्प्लेक्स बनाने की…।
प्रशासन व पुलिस रही मौजूद
शुक्रवार को अलसुबह 13 जर्जर दुकानों को तोड़ने के लिए इंदौर की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी गौरीका वेंचर प्राइवेट लिमिटेड के कई मैनेजर दल-बल के साथ पहुंचे… और पुलिस की सुरक्षा में दुकानें तोड़ने का काम चालू हुआ… जैसे ही जेसीबी का पंजा जर्जर भवन की दीवार पर पड़ा… पूरी दीवार ही टूटकर धराशायी हो गई… मात्र 3 घंटों में 13 दुकानें टूटकर धराशायी हो गईं… अब विकास का एक नया अध्याय चालू होगा… इस कार्रवाई के दौरान… एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस महकमा… नगर पालिका कर्मी उपस्थित थे… बस स्टैंड पर इस दृश्य को देख कहने भी लगे कि सब कह रहे थे कि दुकानें बहुत पक्की हैं… ये तो जेसीबी का पंजा पड़ते ही टूट गईं… जो कुछ दिन पहले नेतागिरी कर रहे थे, वो भी गायब हैं… आज देख लिया… प्रशासन के आगे कुछ नहीं चलता।