प्रवीण सोलंकी
मेघनगर l कथा में कई सारे लोग अगर शांति से आस्था से मन से कथा सुनते है तो इसका मतलब है भगवान उपस्थित हो गए हैँ…. बिछु के साँप के दाँत में जहर होता है उसको निकाल सकते है मनुष्य के रोम रोम में जहर है क्या क्या निकाले मनुष्य कान से निंदा सुनता है मुहँ से निंदा करता है क्या क्या करता है , मधुर बोलो मीठा बोलो रिश्तेदारों के समक्ष पिता को सामने मत बोलो उसका दिल मत जलाओ कई बेटे अपनी माँ से कई महीनों तक बात नही करते है उसको पीडा होती है l

परिवार में कितना भी मनमुटाव हो बोलना बंद मत करना l मनुष्य जीवन मिला है तो भाई से भाई को भाई से बहन को परिवार के सदस्यों को आपस मे माता पिता के साथ पडोसी को पडोसी के साथ मीठा बोलना चाहिए अभी नही तो क्या पशु बनोगो तब बोलोगे l मीठा बोलने का अर्थ है हम कुछ अच्छा बो रहे है l अच्छा बोयेंगे तो अच्छा उगेगा l भजन मीठा फल अब क्या तुम पाओ बीज कांटों का बीज जो बो चुके हो l उन्होंने मीरा की भक्ति का उल्लेख किया l पँडित श्री नागर ने छोटे भाई और बडे भाई के रिश्ते को भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का उदाहरण देते हुए समझाया की लक्ष्मण जी पूरे 14 वर्षों तक सोये नही श्रीराम के चरणों मे बैठे रहते थे चरणों की सेवा करते थे l

हर घर स्वर्ग हो जाये अगर छोटे बड़ो की सेवा करने लग जाये l फल वाले झाड पर ही पत्थर मारे जाते हैँ….बिना फल वालो झाडो पर कोई पत्थर नही मारता l फूल का उदाहरण देते हुए बताया कि उसमें सुई चुभाई जाती है तो भी वो नही डरता माला बनकर भगवान के गले की शोभा बन जाता है फूल को कूटा जाता है तो उसका इत्र बन जाता है l मनुष्य को ये उदाहरण याद रखना चाहिए….कितना कष्ट मिले महकते रहो l गुरु की बात का कभी बुरा नही मानना माता पिता की बात का कभी बुरा मत मानना ये अपने हित मे ही बोलते है ये खुरदरे होते है लेकिन मैल निकाल देते है l जिसने सूरज का ताप और बाप की डांट सह ली वो ही आगे बढेगा….मनुष्य जीवन को नई दिशा और ऊर्जा देने वाली ये बाते मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री वनेश्वर मारुति नंदन हनुमान मंदिर पर पंडित कमल किशोर नागर जी के मुखारविंद से चल रही श्रीमद् भागवत कथा में उन्होंने कही l आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य और मध्य प्रदेश के यशस्वी समाजसेवी श्री सुरेश चंद्र पूरणमल जैन राजेश रिंकू जैन और उनके परिवार ने पंडित कमल किशोर नागर जी का अभिनंदन कर दूर-दूर से कथा सुनने के लिए पहुँचे श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया l