आलीराजपुर ब्यूरो चीफ
चंद्रशेखर आज़ाद नगर भाभरा में पूर्व से निर्मित आजाद ग्राउंड स्मारक पर प्रस्तावित बस स्टैंड और व्यावसायिक दुकानें बनाकर बेच कर अन्दर ही अंदर कमीशन का जो खेल नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती निर्मला डावर और उनकी परिषद प्रस्ताव बनाकर तहसील कार्यालय चंद्रशेखर आज़ाद नगर भाभरा तहसीलदार जितेंद्र तोमर को भेज चुकी है जिस पर अब विरोध भी शुरू हो गया है जोबट विधायक सेना पटेल आम आदमी पार्टी नेता दिलीप सिंह भूरिया और पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र जैन ने भी इस पर आपत्ति ले ली है लेकिन नगर परिषद के अध्यक्ष श्रीमती निर्मला डावर की तो बोलती बंद है लेकिन उनके कुछ पार्षद को नींद नहीं आ रही है क्योंकि इन बस स्टैंड और दुकानें बनाने के पीछे उनका बहुत बड़ा लालच छुपा हुआ है जो जनता जानती है लेकिन अंधेर नगरी चौपट राजा जैसा एक तरफा काम करने की आदत बनी हुई है और आज तक उनका अड़ियल रवैया और लोकहित के पक्ष में कोई निर्णय नहीं लेते आना उनकी आदत सी हो गई है ।क्योंकि उन्होंने नगर के बिचो स्थित खोदरे पर बनी पुलिया पर दुकानें बनाकर बेच दी खोदरे किनारे दुकानें बनाकर बेच पीडब्लूडी पुराने धर्म शाला बस स्टैंड पास सड़क पर ही दुकानें बनाकर बेच दी जनपद के की ओर पीडब्ल्यूडी और जनपद की सड़क किनारे जमीन पर दुकानें बनाकर बेच दी ।साथ ही कुम्हार मोहल्ला बस स्टैंड पीडब्ल्यूडी विभाग की नेशनल 56 रोड की जमीन पर दुकानें बनाकर बेच दी ।जिसमें से सड़कों किनारे बनी सबसे पहले वाली दुकानों की तो लीज ही खत्म हो चुकी है और अब उनको तोड़ कर सड़क को अतिक्रमण मुक्त करना चाहिए ताकि कोई ट्रैफिक जाम ना हो बस स्टैंड पर साथ ही आजाद विधायक और फॉरेस्ट के सामने भी सड़क पर नेशनल हाईवे की 56 की जमीन पर दुकानें बनाकर बेच दी जो कि नाली पर बनी है ।
अब इससे पेट नहीं भरा आलीराजपुर जिले में पैसा कानून लागू है जिसमें प्रावधान है नगर परिषद हो या जिला कलेक्टर हो या तहसीलदार हो एक इंच जमीन किसी को भी व्यवसायिक उपयोग को ग्रामसभा की अनुमति बिना नहीं दे सकते है ।जबकि यह ग्राउंड की जमीन एक गरीब और बेसहारा मां बेटों से कांग्रेस के चंद्रशेखर आज़ाद नगर के प्रथम ग्राम पंचायत अध्यक्ष कन्हैया लाल चौहान ने सामाजिक उपयोग और राष्ट्रीय कार्यक्रम का संचालन साथ ही सामाजिक एवं आजाद के शहीद दिवस पर मेले साथ ही भगोरिया क्रिकेट साथ ही आदिवासी कार्यक्रमों तथा नगर की सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन कर सके साथ ही शादी या किसी के मृत्यु कार्यक्रम भी यहां आयोजित हो सके उसके लिए दान में ली थी यह जमीन एक आदिवासी परिवार ने सामाजिक कार्य के लिए दान की है । जो जमीन किसी संस्था को दान की थी उसको दोबारा किसी व्यवसाई के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता लेकिन नगर परिषद अध्यक्ष और कुछ पार्षदों की लालच इतनी बढ़ गई है कि उनको शहीद स्मारक ग्राउंड भी नहीं दिखाई दे रहा है उनको तो हरे हरे नोटो का सिर्फ कमीशन के रूप में बंडल ही दिखाई दे रहा है ।।जो बिल्कुल निंदनीय काम है ।