झाबुआ डेस्क
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संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार के विरुद्ध प्रयुक्त असंसदीय एवं असंवैधानिक भाषा के विरोध इसी तारतम्य मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद की ओर से हम आपका ध्यान विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के दौरान घटित एक अत्यंत गंभीर एवं निंदनीय घटना की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। दिनांक 19 फरवरी 2026 को विधानसभा सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान, माननीय नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जी द्वारा प्रदेश में संसाधनों के आवंटन में पक्षपात के मुद्दे को उठाया जा रहा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी द्वारा “औकात में रहना” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जो न केवल अत्यंत आपत्तिजनक है, बल्कि पूर्णतः असंसदीय एवं असंवैधानिक भी है।

यह भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं तथा सदन की गरिमा के प्रतिकूल है। विशेष रूप से यह टिप्पणी एक प्रमुख आदिवासी नेता के प्रति की गई है, जिससे समस्त आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। यह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि लोकतंत्र में समानता, सम्मान और प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों पर सीधा प्रहार है। एक संसदीय कार्य मंत्री का दायित्व सदन की गरिमा बनाए रखना होता है, किंतु इस प्रकार की भाषा का प्रयोग उनके पद की गरिमा के पूर्णतः विपरीत है। ऐसे में उनका मंत्री पद पर बने रहना उचित नहीं है।
अतः, मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद निम्नलिखित मांगें प्रस्तुत करती है-
1. श्री कैलाश विजयवर्गीय को तत्काल मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।
2. इस असंसदीय एवं अपमानजनक टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।
3. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
अतः आपसे निवेदन है कि इस ज्ञापन पर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें।