दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
चंद्रशेखर आजाद नगर भाभरा में एकीकृत बाल विकाश कार्यालय में हमेशा परियोजना अधिकारी की कुर्सी खाली रहती है क्योंकि जिले का दुर्भाग्य है एक अधिकारी को एक से ज्यादा का चार्ज मिल जाता है और वह जिले में बैठे बैठे ही अन्य विभाग का मावा खाता रहता है

जबकि जिस विभाग में मुख्य आधिकारी ही नदारद रहते है उस विभाग के काम काज और पूरा संचालन भी भगवान राम भरोसे जैसा चलता होगा चंद्रशेखर आजाद नगर भाभरा ब्लॉक में कुल 215 आंगनवाड़ी केंद्र है जिसको रोजाना नहीं देखा जाए तो उनकी सारी व्यवस्था गड़बड़ हो जाती है ।

अधिकारियों के मुख्यालय पर होने के बाद भी सारी व्यवस्था ठीक नहीं रहती और अभी कुछ माह से तो प्रभारी परियोजना अधिकारी के भरोसे चल रहा है कार्यालय जिससे सबकी मौज है।कोई कुछ भी करे कोई देखने वाला ही नहीं क्योंकि दो दो पदों पर पदस्थ होने से कौन से विभाग का काम किया जाए और कौन से का नहीं यही पदस्थ अधिकारी स्वयं ही निर्धारित कर सकता है

जो कि किसी एक पद को महत्व देगा और दूसरे पद को सिर्फ दिखावटी रूप से संचालित करेगा ।तो उस विभाग का क्या होगा जो कि बच्चों से जुड़ा है जिसका मुख्य काम ही आदिवासी क्षेत्र में बालक बालिकाओं को कुपोषण और अन्य बीमारियों के साथ साथ शिक्षा की नींव बनाने में सहयोग देना है

लेकिन जहां अधिकारी स्वयं महीने में गिने चुने दिन सिर्फ उपस्थिति रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर करने आते है और उस विभाग का सारा काम जिला मुख्यालय से चलता हो उस विभाग का और उस विभाग के सारे काम काज और सारी योजनाएं भरोसे ही चलती होगी ।जब किसी को प्रभारी बनाना ही है
जिला परियोजना अधिकारी को तो क्षेत्र में जो भी वरिष्ठ अधिकारी या कर्मचारी हो उसको ही प्रभार देना चाहिए ताकि विभागीय कार्य सुचारू रूप से सके रोजाना कुछ ना कुछ नवागत होता ही रहता है शासन प्रशासन की योजनाओं में लेकिन जिले के अधिकतर विभाग प्रभारियों के सहारे ही है किसी के पास दो विभाग के चार्ज है
किसी के पास तीन विभाग के चार्ज है तो किसी के पास चार चार विभाग के चार्ज है यही जिले के पिछड़े होने की मुख्य वजह है काबिल अधिकारी गली गली घूमता रहे और प्रभारी अधिकारी मावा खाता रहे यही जिले का दुर्भाग्य है ।।