नकली रेत के कारोबार अलीराजपुर जिले में काफी फल फूल रहे है ।।
दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
अलीराजपुर जिले के किसी भी गांव गली मोहल्ले में देखो तो रोजाना रात के 3 बजे से रात 10 बजे तक सैकड़ों ट्रैक्टर और ट्राले जिले के रेत का परिवहन कर निकलते है लेकिन मजाल है कि जिले का कोई खनिज अधिकारी या या फिर अन्य जवाबदार अधिकारी के अलावा जिला कलेक्टर इस पर कोई कार्यवाही करवा सके आज जिले भर में कोई भी वैध रेत की खदान नहीं है फिर भी रोजाना 2000 ट्रैक्टर और 400 ट्राले रेत अलीराजपुर जिले से अन्य जिलों में निकलकर बिकने जाती है लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि जिले के किस खेत से यह नकली रेत बनकर आ रही है
जिससे आसपास के जिले के अनजान लोगों और अपना आशियाना बनाने के सपनों पर पानी घुमाने की योजना है क्योंकि जिले से गिने चुने क्षेत्रों से ही रेत निकलती है लेकिन इस जिले के अधिकतर गांवों में बडौदा मोरम को पानी से धोकर या फिर उस मुरम को पानी में भिगोकर नकली रेत बनाने का जोर शोर से जिले के कई गांवों में काम चलता है और वहीं से ट्राले और ट्रैक्टर वाले सस्ते भाव में रेत खरीदखर महंगे भाव में अन्य लोगों को बेचने रात में निकल पड़ते है जिसमें अलीराजपुर जिले से बड़वानी दाहोद ,रतलाम, इंदौर, बड़ौदा आदि जिले में इस रेत का परिवहन किया जा रहा है ।इस कार्य में जिला खनिज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मौन स्वीकृति मिली हुई है
अवैध रेत परिवहन वालों को अगर वह नहीं मिले होते तो इतनी मात्रा में रेत जिले से परिवहन अवैध रूप से नहीं होता जिससे सरकार को हर महीने लाखों का नुकसान जानबूझकर किया जा रहा है ताकि जिले भर के पुलिस थाने फॉरेस्ट विभाग और खनिज विभाग राजस्व विभाग के लोगो का कमीशन राजस्व के रूप में सीधे उनकी जेब में जाता है ।। जिले के खनिज अधिकारी सतीश नागले जी से जब संवाददाता ने फोन पर अवैध रेत परिवहन के बारे में पूछा तो उनका जवाब था में अभी अस्पताल में हु बाद में आपसे बात करता हु ।