सुनील तोमर आलीराजपुर
प्राथमिक माध्यमिक उच्च माध्यमिक (पीएमयूएम) शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष मुरली मनोहर अरजरिया ने प्रदेश के माननीय शिक्षा मंत्री जी को पत्र लिखकर अध्यापकों के साथ हो रहे अन्याय को तत्काल रोकने की मांग की है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रदेश का अध्यापक वर्ग पहले से ही अनेक प्रशासनिक एवं नीतिगत निर्णयों से आहत है और अब सरकार में बैठे जिम्मेदार लोगों द्वारा अध्यापक हितों पर एक और गहरा प्रहार किया गया है। श्री अरजरिया ने कहा कि जिन अधिकारों और पात्रताओं को अध्यापकों को नियुक्ति दिनांक से प्राप्त माना गया, उन्हें अब एक-एक कर समाप्त किया जा रहा है। अब तक बीमारी की स्थिति में अध्यापकों को चिकित्सा अवकाश की सुविधा प्राप्त थी। साथ ही, ग्रीष्म एवं अन्य अवकाशों के दौरान जब अध्यापकों से शासकीय कार्य कराया जाता था, तो उसके एवज में अर्जित अवकाश प्रदान किया जाता था। इन्हीं आश्वासनों के आधार पर वर्षों से अध्यापकों से अवकाश काल में भी कार्य लिया जाता रहा है।

परंतु अब शासन द्वारा एकतरफा फरमान जारी कर दिया गया है।
पोर्टल पर मेडिकल और अर्जित अवकाश की जानकारी भरने से संबंधी जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों में, अध्यापक संवर्ग के 2018 के पूर्व ग्रीष्म अवकाश में किए गए कार्य के बदले मिलने वाले अर्जित अवकाश को समाप्त कर दिया गया है। इतना ही नहीं, वर्षों से प्रदत्त और अध्यापकों द्वारा संचित किए गए 2018 के पूर्व के मेडिकल अवकाश भी समाप्त किए जा रहे हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण है। श्री अरजरिया ने कहा कि यह अत्यंत खेदजनक है कि सरकार लगातार शिक्षकों पर प्रहार कर रही है। हर बार कोई न कोई नया विभाजन, नया नियम अथवा कटौती आदेश लाकर अध्यापक वर्ग को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। वही जिला अध्यक्ष भंगुसिंह तोमर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम इस शिक्षक-विरोधी नीति का खुला और सशक्त विरोध करते हैं। सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी जाती है कि यदि अध्यापकों को उनके संवैधानिक, वैधानिक एवं सेवा-संबंधी अधिकारों से वंचित करने की यह प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो इसके परिणामों के लिए सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि अध्यापक कोई बोझ नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की रीढ़ है। अध्यापक अपने अधिकारों के लिए संगठित हैं, सजग हैं और संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार हैं।