निकलेश डामोर
झाबुआ। इन दिनों जिला चिकित्सालय में रंगारी पुताई का काम जोरों पर चल रहा है। रंगाई पुताई के नाम पर लाखों रुपए के बिल धड़ल्ले से लगा दिए जाएंगे अब सवाल यह है कि क्या जिला चिकित्सालय में चल रही रंगाई पुताई का काम टेंडर प्रक्रिया से किया जा रहा है या फिर किसी एक आदेश के कागज पर मोहर लगाकर यह तो विभाग ही जाने, देखा जाए तो रंगाई पुताई के नाम पर भी लाखों के वारे न्यारे हो जाएंगे

अब रंगाई पुताई के खेल में कौन-कौन खिलाड़ी ब्रश मारता है यह देखना है यदि बगैर टेंडर प्रक्रिया के रंगाई पुताई का काम किया जा रहा है तो निश्चित ही यहां नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा होगा और यदि टेंडर प्रक्रिया में काम किया जा रहा होगा तो विभाग में बैठे मठाधीश अपने चहैतो को कम देकर अपने घर भी चमकवा लेगे क्या कहते हैं आरएमओ साहब..?