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रानापुर में आज जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) रानापुर ब्लॉक के युवाओं द्वारा अलग-अलग मुद्दों को लेकर दो ज्ञापन महामहिम राज्यपाल महोदय के नाम तहसीलदार रानापुर को सौंपे गए।

ज्ञापनों में रानापुर ब्लॉक की कृषि संबंधी गंभीर समस्याओं तथा झाबुआ जिले सहित प्रदेश के अन्य आदिवासी जिलों में आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन छीने जाने के विरोध में ठोस कार्रवाई की मांग की गई। इस अवसर पर जयस ब्लॉक अध्यक्ष राकेश डामोर ने बताया कि देश का मूल निवासी आदिवासी समाज है। राज्यों के गठन में मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है जहां लगभग 22 प्रतिशत आदिवासी आबादी निवास करती है, इसके बावजूद आदिवासियों पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। सरकार द्वारा आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से सिंगरौली जिले में आदिवासी ग्रामीण अपने जंगल और जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहां उद्योगों और खनन के नाम पर आदिवासियों की जमीन जबरन छीनकर पूंजीपतियों को दे दी गई। सरकार एक ओर कानून की बात करती है, वहीं दूसरी ओर स्वयं अपने नियमों का पालन नहीं कर पा रही है। वर्ष 2023 में पेसा कानून लागू करने की बात कही गई, लेकिन व्यवहार में धनबल और पुलिस बल के दम पर 6 लाख से अधिक पेड़ काट दिए गए, जिसका सीधा लाभ बड़े उद्योगपतियों को पहुंचाया गया। एक तरफ प्रधानमंत्री “एक पेड़ मां के नाम” अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आदिवासियों को उजाड़ने का काम किया जा रहा है। जयस ने मांग की कि यह कार्य तत्काल रोका जाए, आदिवासियों को उनके जंगलों में रहने दिया जाए, जिनके घर तोड़े गए हैं उन्हें मुआवजा दिया जाए और जमीन हड़पने के आदेश वापस लिए जाएं। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि झाबुआ जिले के आदिवासी क्षेत्रों में जमीन के सर्वे नंबरों में हेराफेरी की गई है, जिससे गांव-गांव में विवाद और झगड़े की स्थिति बन रही है। इसलिए पुराने सर्वे नंबरों के आधार पर पूरे जिले का पुनः सर्वे कराकर सुधार किया जाए।

साथ ही झाबुआ जिले में गैर-आदिवासियों द्वारा आदिवासियों की जमीन गैर-कानूनी तरीके से हड़पने के मामलों की जांच कर जमीन आदिवासियों को वापस दिलाने की मांग की गई। इसके अलावा झाबुआ और रानापुर क्षेत्र में गैर-आदिवासी पूंजीपतियों द्वारा गरीब आदिवासियों के नाम से जमीन खरीदकर उसका गलत उपयोग किए जाने के मामलों पर रोक लगाने और आदिवासी जमीन को संरक्षित करने की मांग रखी गई। कृषि संबंधी समस्याओं को लेकर दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि कृषि मंडी रानापुर वर्षों से बंद पड़ी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। मंडी में अनाज की खरीदी नहीं होने के कारण अधिकारियों और व्यापारियों की मिलीभगत से आदिवासी किसानों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है। किसान मेहनत करता है, लेकिन उसे उसकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। व्यापारी मनमाने दामों पर अनाज खरीदते हैं और तौल कांटों में गड़बड़ी कर किसानों को नुकसान पहुंचाते हैं। जयस ने मांग की कि मंडी को तत्काल शुरू कर मंडी परिसर में ही अनाज की खरीदी की जाए।

इसके साथ ही रानापुर ब्लॉक में हर फसली मौसम में खाद की भारी कमी को लेकर भी चिंता जताई गई। जयस ने मांग की कि खाद आवंटन के बावजूद कालाबाजारी कहां और कैसे हो रही है, इसकी जांच की जाए। वर्तमान में बाजार में खाद की एक बोरी 600 से 700 रुपये में बेची जा रही है, जो किसानों के साथ अन्याय है। दोषी व्यापारियों और संबंधित सोसायटियों पर कार्रवाई कर किसानों को समय पर और उचित दर पर खाद उपलब्ध कराई जाए। ज्ञापन सौंपते समय जयस ब्लॉक अध्यक्ष राकेश डामोर, कार्यवाहक अध्यक्ष गोविंद मेडा, उपाध्यक्ष अजमेर सिंगाड़, मीडिया प्रभारी धनराज डोडियार, उपाध्यक्ष निलेश हटीला, उपाध्यक्ष अरविंद भूरिया, महासचिव राकेश कटारा, आईटी सेल पंकज भूरिया, दिलीप डामोर, विजय डामोर, अरविंद गणावा, पारू डामोर, राकेश भाभर, अनुराग डामोर, वीरसिंह भूरिया, जोवान, जयेश, प्रदीप, अतुल सहित बड़ी संख्या में जयस कार्यकर्ता व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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