रिपोर्टर-सुनील खोड़े
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पेटलावद – श्री भैरवनाथ मवेशी मेला इन दिनों राजनीति और अपनी निजी महत्वाकांक्षा का शिकार होते हुए नजर आ रहा है…. आर्थिक लाभ के उद्देश्य से मेले के नाम पर मानो यह हालत यह बन चुके हैं की अन्य जिलों और अन्य स्थानों से आए गरीब व्यापारी मेले में आकर पछतावा कर रहे हैं। गरीब व्यापारी एक उम्मीद के साथ आए थे कि मेले में उन्हें रोजगार मिलेगा लेकिन स्थानीय जिम्मेदारों की लापरवाही कहे या फिर नादानी के कारण व्यापारियों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। कड़ाके की ठंड में नदी किनारे यह व्यापारी अपने व्यापार के लिए मशक्कत कर रहे हैं।

मामला इस प्रकार है कि पेटलावद में प्रतिवर्ष श्री भैरवनाथ मवेशी मेले में अन्य राज्यों से झूले व्यापारी अपने झूले लेकर आते हैं। इस वर्ष भी व्यापारी बड़ी संख्या में झूले लेकर आये है। लेकिन मेले में अब तक झूले नहीं लग पाए हैं क्योंकि स्थानीय पार्षद द्वारा जब झूलों की गुणवत्ता और झूले से संबंधित दस्तावेजों पर सवाल उठाए गए तो इसका जवाब ना तो झूले वाले दे पाए और ना ही नगर परिषद। जिस वजह से अब तक मेले में झूले नहीं लग पाए हैं ना ही अब तक मेले का ठीक ढंग से शुभारंभ हो पाया है मेले में राजनीति चरम पर है गुणवत्ताहीन झूले लगाए जाने के भरचक प्रयास किए जा रहे हैं। एक बार तो झूले लगाने का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया था। लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद पुनः मेला क्षेत्र में भूचाल देखने को मिल रहा है।

क्योंकि निष्पक्ष और जिम्मेदार अधिकारियों को नियमों का पालन करवाना है। लेकिन झूले वालों के पास ना तो कोई दस्तावेज है ना ही गुणवत्ता वाले झूले हैं। जो झूले मेले में लाए गए हैं उनमें जंग लगे हैं तो कई वर्षों पुराने झूले आज भी संचालित हो रहे हैं। झूला संचालित करने वाले व्यापारियों के कारण मेले में आए अन्य व्यापारी भी परेशानी का सामना कर रहे हैं। नगर परिषद को चाहिए था कि मेला प्रारंभ होने से पूर्व ही झूला व्यापारियों से दस्तावेज लेना था और पूरे नियमों को ध्यान में रखकर ही मेले की शुरूआत करवाना थी। नगर परिषद की नादानी कहे या फिर लापरवाही के कारण आज अन्य गरीब व्यापारी कड़ाके की ठंड मे ठिठुरने को मजबूर है।