दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
जोबट विधानसभा का वो परिवार जिस परिवार में एक दशक तक जोबट में अपनी सेवा देने का गौरव प्राप्त किया हैं जिसकी सेवा से जोबट क्षेत्र का प्राथीमक विकाश शुरू हुवा था जिसने सबसे पहले आजादी के बाद स्कूले सडक हैंडपम्प कुवे और बिजली नगर परिषद ग्राम पंचायते और बैंक हॉस्टल छात्रावास कॉलेज और अन्य सुविधायो की जोबट में नींव रखी वो हैं जोबट का रावत परिवार जो आजादी के बाद अंग्रेजो द्वारा दिए गए शोषित देश को विकसित देश की और कदम बढ़ाते हुवे नये भारत की काल्पना का सपना लिए अजमेर सिंह रावत, फिर सुलोचना रावत और अब उसी पीढ़ी का नया नौजवान युवा राजनीती दुनिया से दूर अपनी शिक्षा पूर्ण करने के बाद जब जोबट विधानसभा में उनके दादा अजमेरसिंह के कामकॉज के कारण राजनीती में ना चाहते हुवे पारिवारिक राजनितिक होने के नाते जोबट महा विद्यालय के चुनावों को जवाबदारी जब उनको मिली और उन्होंने यह जवाबदारी बखूबी निभाई और nsui को छात्रसंघ के चुनाव में विजय बना दिया उस समय की जोबट की राजनीती abvp की हुवा करती थीं उसको पहली बार में पटकनी देकर राजनीती की पहली सीडी चढ़ते ही पूरा परिवार और जोबट का युवा उनको अपना आइकॉन मानने लगा धीरे धीरे दादा स्वर्गीय अजमेरसिंग रावत जी साथ छोड़ गए उनके बाद उनके पिता स्वर्गीय बच्चू सिंग जी ने भी अल्प समय में उनका साथ छोड़ दिया अब राजनीती की जबाबदारी उनके कंधो पर आ टिकी लेकिन राजनीती में राजनेता पार्टी हाई कमान चुनता हैं और चुनाव उनकी माताजी का हुवा जो राजनीती के बारे में बस अपने परिवार में होती राजनीती और चर्चाओ को सुन सुन अपनी समझ सूझबूझ से फिर से परिवारिक राजनीती को नई ऊचाई पर पहचान दिलाई एक दिन उनको भी अचानक बड़ी परेशानी का सामना उतना पड़ा जिले में जिनको भाभी के नाम का तमगा मिला था

और उनके काम व्यवहार से जोबट ने ऊचाई छुई लेकिन एक असमय उनको भी बीमारी ने घेर लिया और मंच पर ही वो अपनी बात रखते रखते गिर गई और आज वो इस परिस्थिति में हैं की उनको देखकर बस हर कोई आशा भारी नजरों से देखता हैं की अब वो मेरा काम कर दे! अपने दादा और पिता को खोने वाले विशाल रावत अपनी माता की इस बीमारी में अंगत की तरह डटे रहे उनका हर संभव इलाज करवाया उनको कुशक लेकर लोटे और आज कलयुग में एक श्रवण कुमार की भूमिका में उनकी सेवा कर रहे हैं , जनता की ठोंकरो और परिस्थियो के थपेड़ो ने उनको कांग्रेस से भाजपा और आज उन परिस्थिति में पंहुचा दिया की वो अपनी माता की सेवा करें या जोबट की जनता की सेवा करें जनता तो अपना स्वार्थ देखती हैं राजा जितना अमीर होगा राजा जितना पैशा लुटायेगा और जनता जितना उससे लूट सके जनता उसकी को सर पर बिठाती हैं सो विशाल रावत उसी कमजोरी की वजह से राजनीती में मात खा रहे हैं राजनीती में अपनों ने भी बिच में उनको दिशाविहीन कर दिया उनके अपने साथियों ने उनको गलत रास्ते दिखाए और आज वो राजनितिक परेशानी में भी हैं और आज की विषम परिषथिति में भी खड़े हैं लड़ रहे हैं काम कर रहे हैं और अपने परिवार के साथ साथ राजनीती को भी धीरे धीरे आगे बढ़ाकर फिर नई मंजिल की और अग्रसर हैं अंगत और श्रवण कुमार की तरह उनके काम करने के इस अंदाज के कारण लोग अब उनकी प्रसंशा चुपचाप गलियों और चौराहो पर करते हैं ,, और यह चर्चाये उनको एक दिन पारिवारिक और राजनितिक परिस्थितियों में नई उचाईयो पर लेकर जायेगी और जोबट की जनता उनको एक बार फिर आशीर्वाद देगी?