निलेश डावर/जोबट
जोबट क्षेत्र के किसानों की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। खाद वितरण व्यवस्था वर्षों से जस की तस है और हालात यह हैं कि सुबह 5 बजे से लाइन में खड़े होने वाले किसान देर शाम तक निराश होकर घर लौट जाते हैं। खाद वितरण केंद्रों पर दिनभर लंबी कतारें लगी रहती हैं। हालात इतने खराब हैं कि शाम तक आधे किसानों का नंबर भी नहीं आ पाता और अचानक शटर बंद कर दिया जाता है। दो बैग खाद के लिए किसानों को लगातार चार – पांच दिन भटकना पड़ता है, लेकिन परिणाम सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है।
गांव से आए किसान, महिलाएं और बुजुर्ग सबका एक ही हाल है। न तो पानी पीने की सुविधा है, न शौचालय की जगह। घंटों तक धूप और बारिश में भी खड़े रहकर किसान सिर्फ इंतजार करते हैं कि कभी उनका नंबर आए। लेकिन कई बार खाद खत्म हो जाता ओर अगर फिर से आता भी है तो उसे लेना बेहद मुश्किल हो जाता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक किसानों को ऐसे हालात झेलने होंगे? जब खाद आपूर्ति में कोई कमी नहीं है, तो वितरण व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं की जा रही है? क्या प्रशासन सिर्फ किसानों को लाइन में खड़ा करके उनका समय और सम्मान दोनों गंवाने पर मजबूर करेगा?

किसानों की मांग साफ है, खाद वितरण केंद्रों को बढ़ाया जाए, सभी सोसायटी में नगद खाद वितरण सुनिश्चित किया जाए और व्यवस्थाओं पर सख्ती से निगरानी हो। तभी इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा।