दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
2027 का विधानसभा चुनाव आने के पूर्व जोबट विधानसभा क्षेत्र में आम लोगों के गलियारों से चर्चा का विषय है कि भाजपा से अगला उमीदवार कोन क्षेत्रवार लोगो की चर्चाओं का माहौल गरम है और कुछ तथ्यात्मक चर्चाओं के बाद एक नाम जनता के बीच काफी चर्चा में सुनाई दे रहा है । जिसमें श्रीमती सुलोचना रावत जोबट विधायक और आज तक कोई दूसरा उनके जैसा उतराधिकारी भारतीय जनता पार्टी को नहीं मिला पूर्व में भाजपा के मजबूत विधायक माधोसिंह डावर के बाद जोबट में भाजपा को एक अच्छे उम्मीदवार और उनके उतराधिकारी की जरूरत है जिसकी खोजबिन भाजपा में चालू है । लेकिन जोबट में श्री मति सुलोचना रावत के पुत्र विशाल रावत उनके उतराधिकारी नहीं बन पाए और कांग्रेस की श्रीमती सेना महेश पटेल से सत्ता सरकार होने के बावजूद अपनी माता की कुर्सी नहीं बचा पाए और हिमालय जैसे शिखर पर लेकर बिठाने वाली भाजपा सरकार की ही शाख को धब्बा लगा दिया।आज भाजपा को जोबट विधानसभा में एक मजबूत और युवा उम्मीदवार चाहिए जो श्रीमती सेना महेश पटेल को टक्कर दे सके ।श्री मति सेना महेश पटेल कांग्रेस उम्मीदवार है और जोबट की जनता को हमेशा ही जोबट क्षेत्र के बाहर के उम्मीदवार पर भरोसा जताकर उनको विजय बनाया है सबसे पहले स्वर्गीय सुश्री कलावती भूरिया और फिर श्रीमती सेना महेश पटेल ।अब भारतीय जनता पार्टी को एक ऐसा उमीदवार देने की चुनौती है जो जोबट की जनता और उसकी भौगोलिक स्थिति और परिस्थिति के साथ साथ जमीनि हकीकत और उनकी समस्या और उसके समाधान के लिए सजग हो , राजनीतिक पार्टियां जोबट की जनता को उम्मीदवार तो दे सकती है लेकिन यहां की सभी समस्या का समाधान और उनका गंभीरता से समाधान नहीं कर सकता है। क्योंकि जोबट विधानसभा का क्षेत्रफल काफी बड़ा है ।जिनका विकाश करना इतना आसान नहीं आजादी के बाद भी अभी तक जोबट विधानसभा का संपूर्ण विकाश भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक पार्टियां नहीं कर पाई , क्योंकि जोबट विधानसभा में तीन जातियों का प्रभाव ज्यादा है भील भिलाला और पटेलिया हिन्दू मुस्लिम और ईसाई भी अपनी अहमियत रखते है ।लेकिन हार और जीत भील भिलाला दो जाती के लोग ही तय करते है ।।।जोबट क्षेत्र में नए चेहरे के रूप में विशाल रावत के अलावा सुरपाल अजनार , मुकाम डावर , के बाद कोई भाजपा विधानसभा चुनाव विजय के लिए चेहरा बन सकता है तो वो है कुलदीप डावर पूर्व विधायक माधोसिंह डावर और भाजपा के कद्दावर नेता के सुपुत्र जिनको चुनावी अनुभव भी है और चुनावी रणनीति कैसे बनाई जाती है क्योंकि वह बचपन से ही राजनीतिक माहौल में पले बढ़े हुवे है । और दूसरी और एक चुनाव का भी अनुभव है ।पिछले चुनाव में अपने पिताजी माधोसिंह डावर के भारतीय जनता पार्टी के निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरने के बाद चुनावी संचालन की पूरी जवाबदारी उनके ही कंधों पर आ टिकी राजनीतिक अनुभव नहीं होने के बाद भी चुनावी संचालन में जोबट विधानसभा के सभी बूथों के लिए अपने पिता के लिए डिजिटल संसाधनों से वोट मांगने का काम किया और चुनावी समय में कार्यकर्ता जोड़ने का काम हो और उनसे कैसे काम करवाना उन्होंने बखूबी किया । पार्टी चुनाव चिन्ह से तो कई कार्यकर्ता और नेता मैदान में दौड़ कर चुनावी कार्य के लिए चले आते है क्योंकि उनको पार्टी का दायित्व पहले से मिला होता है और हर एक कार्यकर्ता का दायित्व और कर्तव्य भी होता है कि वो अपनी अपनी पार्टी की जीत की नींव में अपनी भी सहभागिता रखे लेकिन बिना पार्टी और बिना तंत्र के सहयोग और कम कार्यकर्ताओं के बल पर अपने पिताजी माधोसिंह डावर को एक सम्मानजनक वोट दिलाकर अपनी काबिलियत साबित करना भी बहुत बड़ी बात है ।भाजपा को एक शिक्षित युवा उम्मीदवार की जरूरत है वो कुलदीप डावर के ऊपर आकर समाप्त हो सकती है ।वैसे भी विशाल रावत और सुरपाल अजनार पिछला चुनाव हार चुके है लेकिन मुकाम डावर नाम का इक्का अभी भाजपा की और से चलना बाकी है । विशाल रावत जिनको जोबट की जनता ने मैदान में सर्व सम्मति से नकार दिया है और जिसके कारण विशाल रावत भारतीय जनता पार्टी की विजय सीट खोने का तमगा भी ले चुके है । जोबट में मुकाम डावर और कुलदीप डावर जैसे युवाओं पर भाजपा अपना अगला दाव लगा सकती है ।।