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आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने शिक्षा विभाग के एडीपीसी रामानुज शर्मा एवं अस्थायी कंप्यूटर ऑपरेटर दीपक धनगर द्वारा किए जा रहे व्यापक भ्रष्टाचार की शिकायत की।  महेश पटेल ने निष्पक्ष जांच कर दंडात्मक कार्यवाही की माँग की।

दिलीप सिंह भूरियाअलीराजपुर ब्यूरो चीफ 

अलीराजपुर मप्र आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने जिले के शिक्षा विभाग मे चल रहे व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर जिला शिक्षा विभाग मे पदस्थ एडीपीसी रामानुज शर्मा एवं अस्थायी कंप्यूटर ऑपरेटर दीपक धनगर की शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिक्षा विभाग सचिव, आदिम जाति कल्याण विभाग सचिव ओर प्रदेश आयुक्त से की है । उन्होंने निष्पक्ष जांच कर दंडात्मक कार्यवाही की माँग की है ।

श्री पटेल ने भेजी गई शिकायत मे बताया की जिला अलीराजपुर में शिक्षा विभाग अंतर्गत कार्यरत रामानुज शर्मा, जो वर्तमान में एडीपीसी,समग्र शिक्षा अभियान के पद पर पदस्थ हैं एवं उनके सहयोगी दीपक धनगर, अस्थायी कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा लगातार विभिन्न माध्यमों से भ्रष्टाचार किया जा रहा है। उनकी गतिविधियाँ शिक्षा व्यवस्था और शासन की छवि को गंभीर क्षति पहुँचा रही हैं। श्री पटेल ने बताया की फर्जी बिल अपलोड कर भुगतान श्री शर्मा एवं श्री धनगर द्वारा प्राचार्यों से एसबीआई डीजीगो पोर्टल की यूजर आईडी, पासवर्ड लेकर इंदौर की फर्मों के फर्जी बिल वर्ष 2023-24 में अपलोड कर एक ही मालिक की फर्म को ₹ 50,000 का भुगतान कराया गया। इसकी तकनीकी जांच अनिवार्य है। एडीपीसी रहते हुए श्री शर्मा द्वारा जेम पोर्टल से की गई सामग्री खरीदी की निष्पक्ष जांच की जाए। उल्लेखनिय है की श्री शर्मा पूर्व में भी बालिका आश्रम पलंग घोटाले, बीआरसी रहते जूता कांड, सोड़वा के रवीना कांड जैसी घटनाओं में संलिप्त रहे हैं। वर्ष 2011 में इन्हें निलंबित भी किया गया था। सीएम हेल्पलाइन (181) पर शिकायत के बावजूद इन्हें मूल संस्था में नहीं भेजा गया, उल्टा पदोन्नति दी गई। अस्थायी ऑपरेटर दीपक धनगर का फोन पर रिश्वत माँगना, प्रशिक्षणों में टेंडर प्रक्रिया के बिना एक ही व्यक्ति को भोजन व्यवस्था दी जाती है तथा बिलों में गड़बड़ी की जाती है। रामानुज शर्मा एवं उनकी पत्नी शोभा शर्मा दोनों का स्थानांतरण हो चुका है, फिर भी कोर्ट स्टे लेकर पदों पर बने हुए हैं, जबकि यह स्थिति नियमों के विरुद्ध है। एक ही प्रकाशन की जबरन किताबों की खरीद की, पिछले 5 वर्षों से ज्ञानदीप पब्लिकेशन, दिल्ली की किताबें जिले के 97 स्कूलों में बिना टेंडर के, प्राचार्यों पर दबाव बनाकर,जबरन खरीदी जा रही हैं। बिना टेंडर के करोड़ों के सौदे किए, जिला शिक्षा कार्यालय में वर्ष 2022-23, 23-24, 24-25 मे करोड़ों के टेंडर नियमों के विरुद्ध कमीशन आधारित आधार पर दिए गए हैं। श्री पटेल ने शिकायत मे कहा कि समस्त आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए ओर शर्मा एवं धनगर को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए। समग्र शिक्षा, जेम पोर्टल क्रय, पुस्तक खरीदी, टेंडर प्रक्रिया आदि सभी बिंदुओं पर जांच समिति गठित कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। दोषी पाए जाने पर कठोर अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

यह प्रकरण न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि प्रदेश की आदिवासी शिक्षा व्यवस्था को गिराने वाला एक सुनियोजित षड्यंत्र है, इन पर त्वरित कार्रवाई कर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मंशा को बल प्रदान करें।

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