सुनिल डामर
राज्य एवं केंद्र सरकार जहां एक ओर आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा स्तर को सुधारने के लाख रुपए लगाकर तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन उसकी मॉनिटरिंग कैसे की जाए या मॉनिटरिंग करने वाले जिम्मेदार ही जब लक्ष्मी यंत्रों के आगे नतमस्तक हो जाए तो फिर शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा..?

ऐसा ही मामला झाबुआ जिले के विकास खंड थांदला के कुकडीपाडा संकूल के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय बलियापाडा का है जहां स्कूल खुले लगभग 20 दिन हो गए लेकिन प्राथमिक विद्यालय बलियापाडा का ताला कब खुलता है और कब बंद होता है या यूं कहें कि यह स्कूल राम भरोसे हैं…।और या यूं भी कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि लक्ष्मी यंत्रों के आगे जिम्मेदार के संज्ञान में होते हुए भी कोई कार्यवाही नहीं…?