सुनिल डामर
16 जून से जिलेभर में स्कूल शुरू हो गए हैं,लेकिन इसके बाद भी स्कूल भवनों का मरम्मतीकरण नहीं किया जा सका है।इस बारिश में एक बार फिर टपकी छतों के बीच छात्र-छात्राओं को पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ेगा।यह हाल हैं जिला मुख्यालय से लगभग 60 किमी कि दुरी पर स्थित कुकडीपाडा संकूल का है। संकूल के अंतर्गत ऐसी कई ग्रामीण स्कूलों के जहां पर लंबे समय के बाद भी स्कूल भवनों की स्वीकृति नहीं मिल पाई है।पुराने जर्जर भवनों एवं टपकती छतों,में ही स्कूलों का संचालन किया जा रहा है।
विभाग नहीं दे रहा ध्यान
कई बार विभागीय अफसरों का ध्यान आकर्षित कराए जाने के बाद भी इस संबंध में किसी प्रकार के कारगार कदम नहीं उठाए जा सके है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि स्कूल भवनों के मरम्मतीकरण में स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बजट के अभाव में मरम्मतीकरण का काम नहीं हो सका है।बता दें कि कई बार विभागीय तौर पर पत्राचार किया गया है,लेकिन स्कूल भवन निर्माण की स्वीकृति नहीं मिल पाई है।दबी-जुबान स्कूल के शिक्षकों का भी मानना है कि राशि के अभाव में जर्जर भवनों का मरम्मतीकरण नहीं किया जा रहा है।

विकास के लिए सालाना मिलती है राशि उसका भी पता नहीं सूत्रों का कहना है कि स्कूल भवनों के मरम्मतीकरण एवं विकास को लेकर स्कूल प्रबंधन को लेकिन इस राशि से क्या कार्य किए गए हैं,इसका पता तक नहीं है।
फिलहाल कम है बच्चों की दर्ज संख्या
भले ही हफ्ते भर पहले स्कूल खुली हो फिलहाल बच्चों की दर्ज संख्या बेहद ही कम कर बताई जा रही है। अभिभावकों का भी दबी जुबान कहना हैं कि अभी पढ़ाई की शुरुआत नहीं हो पाई है और शिक्षक-शिक्षिकाएं भी समय पर स्कूल नही पहुंच रहे हैं।यही वजह है की बच्चे कम ही स्कूल पहुंच रहे हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश में सुधारने थे जर्जर भवन इस वर्ष जर्जर भवनों को नहीं सुधरा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार क्षेत्रों के आसपास के स्कूल भवनों की स्थिति तो ठीक ठाक है,लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की शालाओं के हाल-बेहाल है।

मनमर्जी से स्कूलों का संचालन
कुकडीपाडा संकूल की इतनी बद से बद्तर स्थिति है कि यहां सब मर्जी के मालिक हैं।प्राथमिक,माध्यमिक व हायर सेकंडरी स्कूल का संचालन भी राम भरोसे है।अधिकतर शिक्षक शिक्षिकाएं स्कूल से करीब 15 से 20 किमी रोज ही सफर तय कर आना जाना कर रहे हैं।आलम यह है कि वे निर्धारित समय पर स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं।यहां तक कि संकूल प्राचार्य का भी आने जाने कोई टाईम-टेबल नही है।दूर-दराज की शालाओं में से कई शिक्षक बगैर सूचना के ही गायब रहते हैं।विश्वनीय तौर पर औचक निरीक्षण के दौरान ही लापरवाही उजागर हो पाती है।अन्यथा मनमर्जी से सरकारी स्कूलों का संचालन हो रहा है।