दिलीपसिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
चंद्रशेखर आजाद नगर भाभराके बड़ा खुटाजा स्थित जलीबोर फलिया में एक बार फिर तालाब निर्माण का काम विवादों में घिर गया है। पोकलेन मशीन का उपयोग कर किए जा रहे इस निर्माण कार्य पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं और इससे पहले तहसीलदार जितेंद्र सिंह तोमर ने काम रुकवाकर जांच भी करवाई थी, जिसके बाद ट्रैक्टर और जेसीबी हटा लिए गए थे। तब से काम बंद था, लेकिन अब फिर चालू कर दिया गया है।
यहां राजस्थान के ठेकेदार जसराज जादव (जस्सू) द्वारा यह काम फिर से शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, यह निर्माण कार्य नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। सबसे बड़ा आरोप यह है कि तालाब निर्माण में मजदूरों के बजाय चोरी-छिपे मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि ऐसी परियोजनाओं में स्थानीय मजदूरों को रोजगार देना अनिवार्य होता है।
इस मामले में पंचायत सचिव से लेकर इंजीनियर सज्जनसिंह चौहान तक कोई भी अधिकारी जानकारी देने को तैयार नहीं है। सचिव जहां फोन नहीं उठा रहे हैं, वहीं इंजीनियर चौहान भी कार्य की लागत या यह किस योजना के तहत किया जा रहा है, इसकी जानकारी देने से कतरा रहे हैं। यह स्थिति प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
ठेकेदार पर कार्रवाई से क्यों कतरा रहा प्रशासन?
यह पहला मौका नहीं है जब इस ठेकेदार पर आरोप लगे हैं। पूर्व में भी इसी ठेकेदार ने एक ग्राम पंचायत काकड़बारी में तालाब निर्माण का काम किया था, जिस पर विवाद हुआ था। ऐसे में सवाल उठता है कि बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले इस ठेकेदार पर प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहे हैं? क्या ठेकेदार को किसी का संरक्षण प्राप्त है? यह बाहरी ठेकेदार है जो वर्षों से स्थानीय राजनेता का साझेदार है जिसके संरक्षण प्राप्त है यह ठेकेदार स्थानीय ठेकेदारों को उस राजनेता के नाम से अधिकारियों और कर्मचारियों से धमकियां दिलवाता है और उन पर कार्यवाही भी करवा देता है और यह जब बिना अनुमति और बिना राशि के काम करने को तैयार हो जाता है
और लोगो की निजी जमीनों पर जबरन तालाब भी बना लेता है और उनको धमकियां भी देता है साथ ही उनको किसी भी प्रकार का कोई मुआवजा नहीं देता बाद में अधिकारी कर्मचारी और सरपंच मिलकर कमीशन देकर राशि मंजूर करवाकर बंदर बाट कर ली जाती है कभी कभी राशि साल भर बाद भी मंजूर करवाकर निकलवा ली जाती है ।क्या प्रशासन और नेताओं ने इनकी लक्ष्मी तंत्र के आगे सरेंडर कर दिया है जिससे किसी भी प्रकार से कार्यवाही नहीं होती चाहिए वहां के मजदूर और पीड़ित लोग कितना भी चिल्लाते भी रहे । आगे देखना है क्या जवाबदार अधिकारी ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई करते है या फिर मामला अभी भी से ठंडे बस्ते मे डाल दिया जाता है ।