सुनिल डामर
शासन की जल जीवन मिशन योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सभी परिवारों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना तथा पानी जैसी गंभीर समस्याओं से निजात दिलाने का है। जल जीवन मिशन के माध्यम से देश के सभी ग्रामीण परिवारों को पाइप लाइन के माध्यम से जोड़कर पीने का स्वच्छ जल पहुंचाना शासन का लक्ष्य है।योजना के माध्यम से प्रत्येक घर को नल का कनेक्शन उपलब्ध करवाकर स्वच्छ जल उपलब्ध करवाना है। लेकिन थांदला जनपद की ग्राम पंचायत सेमलिया (नारेला) में 251.55 (दो करोड़ इक्यावन लाख पच्छपन हजार की लागत से बनी टंकी मात्र शौपीस बनकर रह गई। है।या यूं कहें कि इसमें भी भारी भ्रष्टाचार हुआ। टंकी का निर्माण हुए लगभग तीन साल हो गया लेकिन टंकी से जल वितरण कब होगा इसका जवाब स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी देने को तैयार नहीं है। ग्राम पंचायत सेमलिया (खवासा) की लगभग 7 हजार से अधिक कि जनसंख्या मात्र 2 हेड पंपों पर निर्भर है।ऐसी स्थिति में भी अनुमान लगाया जा सकता है कि गांव में पानी की कितनी गंभीर समस्या बनी हुई है।

ग्रामीणों को इंतजार है कि स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में बैठे अधिकारी कब एसी रूम छोड़ कर बाहर निकलेंगे। और शासन की इस करोड़ों की योजना का लाभ ग्रामीणों को मिले व जल संकट से निजात मिले।
अब सवाल यह है कि स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपने एसी रूम से बाहर कब निकलेंगे??और ग्रामीण क्षेत्रों में बनी करोड़ों की जल जीवन मिशन योजना के तहत पानी की टंकियों से जल वितरण कर कब जल संकट जैसी गंभीर समस्या को दूर करेंगे।

वर्तमान में प्रधानमंत्री की मुख्य योजनाओं में से एक जल जीवन मिशन योजना से बनी टंकी से पानी मिलेगा ऐसी आस लगाए बैठे हैं ग्रामीण।