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मूर्तियां हजार लगना चाहिए लेकिन सम्मान का ख्याल रहे। आदिवासी महापुरुषों की जंग खाती मूर्तियाँ, सम्मान की अनदेखी

संपत धाकड़

हमारे आदिवासी समुदाय के महान नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों की कई जगह आदिवासी संगठनों द्वारा स्थापित की गई मूर्तियाँ आज उपेक्षा की शिकार हो रही हैं। धार के कुक्षी, सहित झाबुआ, अलीराजपुर जिलों में इन महापुरुषों की मूर्तियाँ जंग खा रही हैं, टूट-फूट रही हैं और उनकी देखभाल के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

इन मूर्तियों को स्थापित करने का उद्देश्य भावी पीढ़ियों को उनके बलिदान और संघर्षों से परिचित कराना और उन्हें प्रेरित करना था। हालांकि, वर्तमान स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि हम धीरे-धीरे इन उद्देश्यों को भूलते जा रहे हैं। मूर्तियों पर जमी धूल, और जंग की परतें, रखरखाव न होना इस बात का प्रमाण हैं कि स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासन द्वारा उपेक्षा की जा रही है, इनकी नियमित सफाई और रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यह स्थिति न केवल इन महापुरुषों का अपमान है, बल्कि यह हमारे समाज की संवेदनहीनता को भी दर्शाती है। आदिवासी समुदाय, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, उनके प्रतीकों की इस तरह की अनदेखी निराशाजनक है।

स्थानीय लोगों और आदिवासी संगठनों ने स्थापित तो कर दी लेकिन मूर्तियों की मरम्मत और रखरखाव का ध्यान नहीं रखा ओर न शासन प्रशासन से रखरखाव हेतु कोई मांग की है, यह बेहद जरूरी है कि सरकार और स्थानीय निकाय इस मामले पर तुरंत ध्यान दें। इन मूर्तियों की मरम्मत करवाई जाए, उनके आसपास उचित वातावरण बनाया जाए और नियमित रूप से उनकी देखभाल सुनिश्चित की जाए। यह सिर्फ पत्थर, फाइबर और धातु की मूर्तियाँ नहीं हैं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, इतिहास और उन महान आत्माओं का प्रतीक हैं जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान दिया। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम उनका सम्मान करें और आने वाली पीढ़ियों को उनकी गौरवगाथा सुनाते रहें।

यह समय है कि हम अपनी भूल सुधारें और इन आदिवासी महापुरुषों की मूर्तियों को उनका सम्मान दें। इनकी देखभाल करना न केवल हमारा कर्तव्य है, बल्कि हमारी पहचान और इतिहास को जीवित रखने के लिए भी आवश्यक है। कुक्षी के समीप ग्राम कुर्दिगपुरा में पहाड़ी पर लगाई गई भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पिछले दो दिन से तेज आंधी में खंडित होकर पड़ी है, आसपास में अपने आप को समाज के शुभचिंतक कहे जाने वाले लोगों ने देखकर भी अनदेखा करते रहे, महेंद्र कन्नौज को मूर्ति खंडित होकर लावारिश पड़ी रहने की सूचना मिली तो अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे इस उद्देश्य के साथ की सम्मान के साथ वापस लगा देंगे लेकिन मूर्ति पूरी तरह खंडित हो चुकी थी, दुःखी होकर महेंद्र कन्नौज ने कहा जल्द ही उसी जगह सम्मान के साथ मूर्ति लगाई जाएगी।

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