भूत भवन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह में सबसे पहले गणेश जी की पूजा किया और ऐसा माना जाता है कि बिना गणेश पूजन के विवाह अधूरा रह जाता है. शिव-पार्वती के विवाह में गणेश पूजा से जुड़ी जानकारी:शिव-पार्वती के विवाह में गणेश जी की पूजा के संबंध में शिवपुराण, ब्रम्हवैवर्त पुराण, लिंग पुराण, स्कंद पुराण, पद्म पुराण, गणेश पुराण, मुद्रल पुराण इत्यादि ग्रंथों में उल्लेख मिलता है. रामचरितमानस में भी शिव-पार्वती द्वारा गणेश जी के पूजन की पंक्ति मिलती है.

गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है और वह रिद्धि और सिद्धि प्रदान करने वाले भी हैं.सिद्धेश्वर महादेव मंदिर पदम झाबुआ नगर में महाशिवरात्रि महोत्सव मनाया जा रहा है। महोत्सव के पहले दिन महादेव को हल्दी लगाई गई। भक्तों ने मंगल गीत और नृत्य के बीच महादेव को हल्दी-मेहंदी लगाई। कार्यक्रम के बाद देवी-देवताओं की सामूहिक आरती हुई। भोले शंकरा तेरी क्या ही बात है, दूर हो के भी तू साथ है… जैसे गीतों के बीच सिद्धेश्वर महादेव मंदिर हल्दी की रस्म अदा की गयी. यह आयोजन बाबा भोलेनाथ के विवाह को लेकर इस अवसर पर सिद्धेश्वर बाबा का शृंगार किया गया.

भगवान शिव को सबसे पहले हल्दी और तेल का लेपन कर तिलक किया गया. स्नान कराकर नये वस्त्र धारण करवाये गये. उन्हें पीले फूलों से सजाया गया. मंदिर आये भक्त भी भगवान की हल्दी रस्म में शामिल हुए और एक-दूसरे को भगवान की प्रसाद रूपी हल्दी भी चढ़ायी.

हल्दी रस्म के बाद मंदिर में भगवान शिव का संगीत भी हुआ. एवं रात्रि में संगीत में सुंदरकांड का भव्य आयोजन भी किया गया
