
आलीराजपुर
वैसे तो भारतीय वेद-शास्त्रों में अनेक सद्ज्ञान दिया गया है, जो समय काल परिस्थिति अनुसार सहज मार्ग भगवान की भक्ति ही है जो मोह माया से मुक्ति का एक सरल उपाय हैं और जिससे हमें वहां परम आनंद की अनुभूति होती हैं। हरि और हर में अंतर नहीं है हरि अर्थात भगवान विष्णु जो शिव का भजन करते हैं और हर अर्थात भगवान शिव जो विष्णु का भजन, और कृष्ण का भजन करते हैं । शिव परिवार संयुक्त परिवार को जोड़कर एक साथ रहना चाहिए की धारणा सिखाते हैं विचारधारा तो सभी की अलग-अलग होती हैं, परस्पर बैर तो सभी का होता है लेकिन शिव दरबार में बैर नहीं मैत्री दिखती हैं। सर्प, मूषक, सिंह , मयूर में परस्पर शत्रुता दिखती है लेकिन शिवजी के कैलाश धाम में मानसरोवर में सभी एक ही घाट पर पानी पीते हैं एक साथ रहते हैं लेकिन एक साथ रहने पर संयुक्त परिवार दिखता है और शिव की कृपा निरंतर होती हैं। उक्त उद्गार श्री सोलंकी परिवार असाड़ा राजपूत समाज द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण की कथा के प्रथम दिवस में भागवताचार्य पं.अटल जी शास्त्री (नागदा) ने व्यक्त किए। समाज के मीडिया संयोजक उमेश वर्मा कछवाहा ने बताया कि दोपहर 3 बजे से नगर के प्राचीन प्रसिद्ध श्री पंचेश्वर महादेव मंदिर से महिलाओं व पुरुषों ने एक ही ड्रेस कोड में चल समारोह प्रारंभ हुआ सर्वप्रथम कलश यात्रा व शिव महापुराण की पोथी लेकर यजमान परिवार चल रहा था। चल समारोह रामदेव मंदिर, पोस्ट ऑफिस चौराहा, नीम चौक,बस स्टैंड होते हुए असाडपुरा कथा स्थल शिव धाम पहूंचा। चल समारोह के दौरान महाकाल की नगरी उज्जैन से पधारे शिव, पार्वती व भूतों की टोली आकर्षक का केंद्र थी। बैंड बाजे के साथ सैकड़ों श्रद्धालु भजन, कीर्तन गरबा पर थिरकने लगे, परम आनंद लिया। जहां मुख्य यजमान रमण सिंह सोलंकी एडवोकेट व सपत्नीक प्रोफेसर श्रीमती मीना सोलंकी एवं समाजजनों ने शिव महापुराण की पूजा अर्चना व आरती की । इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर धर्म लाभ लिया। आयोजित नौ दिवसीय कथा का आयोजन 24 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक रहेगा । जिसमें अधिक से अधिक धर्म प्रेमी जनता से लाभ लेने का अनुरोध किया गया है।