झाबुआ। कलेक्टर महोदया… हमारे यहां दलाल, सप्लायर और कई किस्म के कलमकार बैठे है… जो एक बार अधिकारियों से मुलाकात करने के बाद लोगों के बीच जाकर उन अधिकारियों को अपना करीबी बताते है… और जब काम नही होता… तो संबंधित विभाग पर दबाव बनाते है… महोदया… आपकों भी पता नही होगा कि अब आपके नाम से महापुरूषों की तस्वीर खरीदने के लिए जनजाति कार्य विभाग पर दबाव बनाया जा रहा है..!
कलेक्टर महोदया जरा आप भी सोचिये… छात्रावास के एक छात्र लिए शिष्यावृति 1444 रूपए आती है… अगर 50 सीटर छात्रावास है तो 72 हजार 200 रूपये और अगर 100 सीटर है तो 1 लाख 44 हजार 400 रूपये प्रति माह होते है… वहीं 30 हजार रूपए आकस्मिक व्यय के लिए आते है जिसमें फिनाईल, बल्ब, ब्रश, डस्टबिन, एसिड, झाडु खरीदने के साथ साथ मरम्मत भी करवानी पडती है…ये आकस्मिक व्यय हर माह नही साल में एक बार मिलता है… अब अगर छात्रावास में 30 हजार रूपए से महापुरूषों की तस्वीरें खरीद लेंगे तो बच्चें खायेंगे क्या…! अगर आकस्मिक व्यय से खरीदें तो पुरे वर्ष तो महत्वपूर्ण सामग्री है वो क्रय कैसे करेंगे अब आप ही बताईयें..!
बडी सोचनिय बात तो यह है कि इन तस्वीरों फ्रेम में क्या चांदी के तार लगे है जो इतनी मंहगी आ रही है… बाजार में जायेंगे तो दो दो सौ में फ्रेम सहित महापुरूषों की तस्वीर मील जायेगी…।
महोदया… ऐसे ही इस चापलुस सप्लायर… जो मौके मौके पर कलमकार बन जाता है… इसकी आदत ही ऐसी है… अब आप ही सोचिये… जो अपने सांस ससुर का नही हुआ… उनकों इसने दर दर भटकने पर मजबुर कर दिया… वो किसी का सगा नही हो सकता…. महोदया इस कलमकार की आदत ही ऐसी है… कुछ समय पहले तात्कालीन एसडीएम झा साहब ने इसके दस्तावेजों में काला गोरा नही किया… मतलब इसके अवैध कब्जें के कागजों पर मोहर नही लगाई तो ये उसके भी पीछे पड गया… तात्कालीन सहायक आयुक्त शकुन्तला मेडम के समय भी इसने सामान सप्लाय का ठेका लिया था सामान आया नही और अधीक्षकों पर ये दबाव बनाने लगा कि बिल भूगतान करों… उस समय भी अधीक्षक इतना परेशान किया था कि सब इसको घेरने वाले थे। ये सारे मामले फिर कभी विस्तार से बताउंगा… अब आप ही सोचिये महोदया… छात्रावासों में महापुरूषों की तस्वीरें सप्लाय करने के लिए अब ये सहायक आयुक्त पर दबाव बना रहा है…।
महोदया आप हो रही है बदनाम
महोदया हमारे यहां कुछ कलमकार ऐसे भी है जो मीठा बोल अपने काम निकलवाते है… अब देखिये ना ये आपका नाम लेकर सहायक आयुक्त पर दबाव बना रहा है… कि महापुरूषों की तस्वीरें खरीदें… बदनाम तो आप होंगी… सारे छात्रावासों मे ंये चर्चा का विषय बना हुआ है… ऐसे में चाटुकार कलमकारों को कार्यालय के आस पास भी ना फटकने दे… आपसे बस यही निवेदन है कि जो छात्रों के हित में हो वही करें…